सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: ‘IDBI बैंक कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं’, राहुल गांधी ने निजीकरण के फैसले पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण का विरोध कर रहे कर्मचारियों को समर्थन दिया है। उन्होंने 29 अक्टूबर को बैंक कर्मचारियों के नाम खुला पत्र लिखकर कहा कि वह उनकी लड़ाई में साथ खड़े हैं। राहुल ने केंद्र सरकार के उस फैसले पर सवाल उठाए हैं, जिसके तहत बैंक की बहुमत हिस्सेदारी कनाडा की निवेश कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने की तैयारी है।

मुनाफे में आने के बाद बैंक बेचने पर सवाल राहुल गांधी ने अपने पत्र में मार्च 2025 में संसद भवन में आईडीबीआई बैंक कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल से हुई मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने उनसे सवाल किया था कि जिस बैंक को कर्मचारियों की मेहनत से घाटे से निकालकर मुनाफे में लाया गया, उसे सरकार क्यों बेच रही है। राहुल के मुताबिक, आईडीबीआई बैंक ने पिछले वित्त वर्ष में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन से बनी संस्था जनता की संपत्ति है और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

52,878 करोड़ रुपये में हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी फेयरफैक्स की कंपनी को बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस सौदे का मूल्य लगभग 52,878 करोड़ रुपये बताया गया है। इसके तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। सौदे के बाद सरकार की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत और एलआईसी की 19 प्रतिशत रह जाएगी।

आरक्षण और कर्मचारियों के अधिकारों पर चिंता राहुल गांधी ने आशंका जताई कि बैंक के निजी स्वामित्व में जाने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन और अन्य सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई। साथ ही 2003 में संसद में सरकार की ओर से आईडीबीआई में कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखने के आश्वासन का उल्लेख किया।

2 और 3 नवंबर को कर्मचारियों का आंदोलन आईडीबीआई बैंक के कर्मचारी संगठनों ने निजीकरण के विरोध में 2 और 3 नवंबर को देशव्यापी भूख हड़ताल का ऐलान किया है। उनकी मांग है कि सरकार कम से कम 6 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदकर अपना बहुमत बनाए रखे और कर्मचारियों के सेवा अधिकारों तथा पेंशन हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

वहीं, सरकार की ओर से कहा गया है कि प्रस्तावित सौदे के तहत मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों और पेंशन लाभों की सुरक्षा के प्रावधान किए गए हैं। ऐसे में निजीकरण को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच मतभेद बने हुए हैं।


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