सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: नई दिल्ली। भाजपा के एक मंत्री ने देश के खुफिया तंत्र और उसकी कार्यप्रणाली को समझने के लिए फिल्म ‘धुरंधर’ देखने की सलाह दी है। उनके इस बयान पर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंत्री की टिप्पणी से असहमति जताते हुए कहा कि वह इस सुझाव से सहमत नहीं हैं।
फिल्म और वास्तविक खुफिया तंत्र पर बहस मंत्री के बयान के अनुसार, फिल्म में खुफिया एजेंसियों के कामकाज और जासूसी अभियानों को जिस तरह दिखाया गया है, उससे लोगों को इंटेलिजेंस की दुनिया समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, शशि थरूर ने इस दावे पर सहमति नहीं जताई। उनका मानना है कि फिल्मों में दिखाई जाने वाली घटनाओं को वास्तविक खुफिया अभियानों और एजेंसियों की कार्यप्रणाली का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
मनोरंजन और वास्तविकता के बीच अंतर फिल्में अक्सर वास्तविक घटनाओं से प्रेरणा लेकर कहानी को नाटकीय रूप देती हैं। इनमें रोमांच और मनोरंजन के लिए कई काल्पनिक पहलू भी जोड़े जाते हैं। ऐसे में किसी फिल्म को खुफिया तंत्र की वास्तविक जानकारी का आधार मानना उचित नहीं है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में फिल्म, राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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