सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: इजराइल के चुनावी नतीजों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। शुरुआती नतीजों में किसी भी गठबंधन को संसद में स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से सरकार गठन की प्रक्रिया पेचीदा हो गई है। हालांकि, बहुमत से पीछे रहने का मतलब यह नहीं है कि नेतन्याहू को तुरंत प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा। नई सरकार बनने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं।

इजराइल की संसद, नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सामान्य तौर पर सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को लगभग 53 सीटें मिली हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन करीब 48 सीटों पर है। अरब दलों के खाते में लगभग 19 सीटें जाने का अनुमान है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों को नए सहयोगियों और समर्थन की तलाश करनी होगी। सरकार बचाने के लिए नेतन्याहू के सामने चार संभावित रास्ते

पहला विकल्प: नए सहयोगियों के साथ गठबंधन। नेतन्याहू अन्य दलों को अपने साथ जोड़कर बहुमत का आंकड़ा हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें नीतिगत समझौते करने और सहयोगी दलों की मांगों पर सहमति बनानी पड़ सकती है।

दूसरा विकल्प: राष्ट्रीय एकता सरकार। नेतन्याहू विपक्ष के कुछ नेताओं के साथ मिलकर साझा सरकार बनाने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि, उनके कई विरोधी पहले ही उनके नेतृत्व में सरकार में शामिल होने को लेकर आपत्ति जता चुके हैं, इसलिए यह रास्ता आसान नहीं होगा।

तीसरा विकल्प: अल्पमत सरकार। संसदीय प्रक्रिया के तहत ऐसी सरकार की संभावना भी हो सकती है, जिसे हर मुद्दे पर स्थायी बहुमत प्राप्त न हो, लेकिन वह नेसेट में विश्वास मत हासिल कर ले। इसके लिए अन्य दलों का बाहरी समर्थन या मतदान से दूर रहना महत्वपूर्ण हो सकता है।

चौथा विकल्प: दोबारा चुनाव। यदि कोई भी नेता निर्धारित समय में सरकार बनाने में सफल नहीं होता, तो अंततः नए चुनाव की नौबत आ सकती है। इस दौरान नई सरकार के गठन तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रह सकते हैं। अंतिम फैसला राजनीतिक समझौतों पर निर्भर

इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग दलों से परामर्श के बाद उस नेता को सरकार बनाने का अवसर देंगे, जिसके पास समर्थन जुटाने की बेहतर संभावना होगी। इसके बाद गठबंधन बनाने के लिए निर्धारित समयसीमा लागू होगी। इसलिए नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य केवल उनकी पार्टी की सीटों पर नहीं, बल्कि दूसरे दलों के साथ समझौते और संसद में समर्थन हासिल करने की क्षमता पर भी निर्भर करेगा। फिलहाल, किसी भी विकल्प को अंतिम परिणाम मानना जल्दबाजी होगी।


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