सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर के नाट्यशास्त्र अध्ययन एवं अनुसंधान केन्द्र द्वारा आयोजित 21 दिवसीय संस्कृत रूपक निर्देशन राष्ट्रीय कार्यशाला के तृतीय दिवस के प्रथम एवं द्वितीय सत्र में प्रतिभागियों को संगीतशास्त्र तथा कूडियाट्टम् की अभिनय परम्परा का सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

तृतीय दिवस के प्रथम सत्र में जयपुर से पधारे विषय विशेषज्ञ प्रो. रामकुमार शर्मा ने संगीतशास्त्र के विविध आयामों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय संगीत की परम्परा, स्वर, श्रुति, सप्तक, ग्राम, मूर्च्छना, जाति, राग, ताल तथा नाट्यशास्त्र में संगीत की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्कृत नाटकों के सफल मंचन में संगीत रस-निष्पत्ति एवं भावाभिव्यक्ति का प्रमुख आधार है। उन्होंने संगीत के सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक पक्षों को उदाहरणों सहित स्पष्ट किया तथा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।

संस्कृत रूपक निर्देशन कार्यशाला में अभिनय परंपरा का प्रशिक्षण

द्वितीय सत्र में केरल से पधारे कूडियाट्टम् विशेषज्ञ वी. गिरीशन (सोपानम्) ने प्रतिभागियों को कूडियाट्टम् की प्राचीन अभिनय परम्परा से परिचित कराया। उन्होंने चारी एवं हस्तमुद्राओं के सैद्धान्तिक तथा व्यावहारिक पक्षों का प्रशिक्षण देते हुए बताया कि कूडियाट्टम् में शरीर की गतियाँ, हस्तमुद्राएँ, नेत्राभिनय और भावाभिव्यक्ति का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने विभिन्न चारियों एवं मुद्राओं का प्रदर्शन कर उनके प्रयोग और नाट्याभिनय में उनकी उपयोगिता को समझाया तथा प्रतिभागियों से व्यावहारिक अभ्यास भी कराया।

संस्कृत रूपक निर्देशन कार्यशाला में अभिनय परंपरा का प्रशिक्षण

दोनों सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी रहे। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में संगीत एवं अभिनय के विविध आयामों का गहन अध्ययन किया तथा कार्यशाला के माध्यम से संस्कृत नाट्य परम्परा की समृद्ध कलात्मक विरासत को निकट से समझने का अवसर प्राप्त कियायह जानकारी प्रो कृपाशंकर शर्मा कार्यशाला समन्वयक ने दी।


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