सात राज्यों में छूटे मतदाताओं को नाम जुड़वाने का एक और मौका
नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मसौदा मतदाता सूची से बाहर हुए लाखों लोगों को निर्वाचन आयोग ने एक और अवसर देने का फैसला किया है। आयोग की यह नई व्यवस्था दिल्ली समेत सात राज्यों के उन मतदाताओं पर लागू होगी, जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरे नाम (ASDD) की श्रेणी में रखे जाने के कारण मसौदा सूची में शामिल नहीं किया जा सका था। आयोग ने अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं के नए गणना प्रपत्र तैयार कराकर अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की प्रक्रिया आसान बनाने के निर्देश दिए हैं।
इस फैसले से सात राज्यों में कुल करीब 4.51 करोड़ मतदाता लाभान्वित हो सकते हैं। इनमें महाराष्ट्र के लगभग 2.06 करोड़, दिल्ली के 47.56 लाख, आंध्र प्रदेश के 44.89 लाख, झारखंड के 43.61 लाख, हरियाणा के 33.83 लाख, तेलंगाना के 73.39 लाख और नगालैंड के करीब 1.57 लाख मतदाता शामिल हैं।
आयोग ने संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे मतदाताओं की बूथवार सूची दोबारा मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित की जाए और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाए। बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को घर-घर जाकर संपर्क करने के साथ व्हाट्सऐप, ई-मेल और एसएमएस के माध्यम से भी प्रपत्र पहुंचाने को कहा गया है।
जिन मतदाताओं ने अपना पता नहीं बदला है, वे नया गणना प्रपत्र भरकर पहले इसे जमा नहीं कर पाने का कारण बताने वाला विवरण दे सकेंगे। राज्य के भीतर पता बदलने वालों को नए पते और विधानसभा क्षेत्र की जानकारी के साथ प्रमाण देना होगा। उन्हें अलग से फॉर्म-8 भरने की आवश्यकता नहीं होगी। बेघर मतदाताओं के मामले में BLO की मौके पर की गई सत्यापन रिपोर्ट को पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा सकेगा।
पहले ही फॉर्म-6 जमा कर चुके मतदाताओं को दोबारा गणना प्रपत्र देने की जरूरत नहीं होगी। उनके आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के तहत निपटाए जाएंगे। आयोग ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि कोई भी पात्र मतदाता अंतिम सूची में शामिल होने के अवसर से वंचित न रहे और दोहरे नाम दर्ज होने से भी बचाव हो।
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