नई दिल्ली: दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के 842 करोड़ रुपये के कथित दवा और चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले में जांच का दायरा बढ़ गया है। अब उन लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जिनके नाम पर कथित तौर पर फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी टेंडर हासिल किए गए और भुगतान प्राप्त किया गया। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन कंपनियों के नामित निदेशकों को कारोबार और सरकारी भुगतान की वास्तविक जानकारी थी या उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया।
जांच और आरोपपत्र के अनुसार, कारोबारी राजीव रंगीला से जुड़ी पांच प्रमुख कंपनियों को सरकारी खजाने से करीब 839 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ। एजेंसी अब इस रकम के लेनदेन और अंतिम लाभार्थियों का पता लगा रही है। इसके लिए कंपनियों के बैंक खातों, आपसी वित्तीय लेनदेन और भुगतान के बाद धनराशि के हस्तांतरण की जांच की जा रही है।
जांच के दायरे में एम साहिब एंड संस प्राइवेट लिमिटेड के सुनील कुमार और लक्ष्मण सिंह की भूमिका भी है। एजेंसी एफ-मेड डिवाइसेज सहित अन्य कंपनियों के साथ उनके कारोबारी संबंधों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।
मामले में पूर्व कर्मचारी ज्ञान चंद के दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग का पहलू भी सामने आया है। आरोप है कि उनके नाम का इस्तेमाल कर उन्हें एक कंपनी का निदेशक बनाया गया था। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि कंपनियों का वास्तविक संचालन कौन करता था और सरकारी धन किन लोगों तक पहुंचा।
यह मामला अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आरोपों की पुष्टि अदालत में होनी बाकी है।
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