नई दिल्ली: दिल्ली में दीपावली से पहले पटाखों की बिक्री के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय तीन दिन की समयसीमा शुक्रवार, 6 नवंबर को समाप्त हो गई। निर्धारित अवधि पूरी होते ही लाइसेंसधारी दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं, लेकिन कई बाजारों में अवैध रूप से पटाखों की बिक्री देर रात तक जारी रही। इससे राजधानी में नियमों के पालन और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुरानी दिल्ली के जामा मस्जिद के पास पाईवालान इलाके में बिक्री के अंतिम दिन खरीदारों की भीड़ रही। यहां अधिकृत दुकानों पर लोग पटाखे खरीदने पहुंचे। वहीं, दुकानों के आसपास और गलियों में रेहड़ी-पटरी वालों द्वारा बिना लाइसेंस पटाखे बेचने की शिकायतें सामने आईं। पाईवालान में 50 से अधिक अस्थायी विक्रेताओं के खुलेआम पटाखे बेचने की बात सामने आई। सदर बाजार, भागीरथ पैलेस, चांदनी चौक और करोल बाग जैसे इलाकों में भी अवैध बिक्री की सूचना मिली।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री 4 से 6 नवंबर तक निर्धारित स्थानों पर करने की अनुमति दी थी। प्रत्येक पैकेट पर उत्पाद से संबंधित क्यूआर कोड होना अनिवार्य था। पारंपरिक पटाखों, बेरियम युक्त आतिशबाजी और लड़ियों की बिक्री पर रोक लगाई गई थी।
वैध दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए समयसीमा समाप्त होने पर कारोबार बंद कर दिया, जबकि अवैध विक्रेता बिना किसी अनुमति के बिक्री करते रहे। इससे नियमों का पालन करने वाले कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, 7 और 8 नवंबर को ग्रीन पटाखे केवल सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक चलाए जा सकते हैं। अस्पतालों, नर्सिंग होम, वृद्धाश्रम और अधिसूचित शांत क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में आतिशबाजी प्रतिबंधित है। 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर लागू हो जाएगा।
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