सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : 4. text :
एलएनसीटी यूनिवर्सिटी, भोपाल के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल द्वारा आईक्यूएसी के तत्वावधान में 20 से 22 अगस्त 2026 तक ‘रिसर्च पब्लिकेशन एंड एथिक्स’ विषय पर तीन दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शोधकर्ताओं के बीच शोध की नैतिकता, शोध की विश्वसनीयता, जिम्मेदार प्रकाशन प्रक्रियाओं और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन सत्र के साथ हुआ, जिसमें एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अनुपम चौकसे, रजिस्ट्रार, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षकगण और प्रतिभागी उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र में जिम्मेदार शोध, शोध की पारदर्शिता एवं गुणवत्ता आधारित प्रकाशन के महत्व पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि मजबूत अकादमिक और शोध वातावरण के निर्माण के लिए शोध में ईमानदारी और नैतिक मानकों का पालन आवश्यक है।
पहले दिन शोध प्रकाशन और नैतिकता पर चर्चा
20 अगस्त को एम्स भोपाल के डॉ. सुकेश मुखर्जी ने ‘रिसर्च पब्लिकेशन एंड एथिक्स: फ्रॉम रिस्पॉन्सिबल रिसर्च टू हाई-इम्पैक्ट पब्लिशिंग’ विषय पर जानकारी दी। उन्होंने शोध की मूलभूत अवधारणाओं, रिसर्च इंटीग्रिटी, IMRAD फ्रेमवर्क, पांडुलिपि तैयार करने की प्रक्रिया, प्लेजरिज्म, प्रीडेटरी पब्लिशिंग, नैतिक तरीके से शोध-पत्र प्रस्तुत करने, उपयुक्त जर्नल के चयन और अकादमिक लेखन में AI के जिम्मेदार उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने AI की सहायता से शोध प्रकाशन और विभिन्न जर्नल्स के दिशा-निर्देशों से जुड़े प्रतिभागियों के सवालों का भी समाधान किया।
दूसरे दिन शोध में अनैतिक गतिविधियों पर मंथन
21 अगस्त को आईआईएसईआर भोपाल के डॉ. चंदन साही ने ‘रिसर्च एथिक्स एंड मिसकंडक्ट’ विषय पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शोध की विश्वसनीयता बनाए रखना केवल प्रमुख शोधकर्ताओं की ही नहीं, बल्कि शोध दल के प्रत्येक सदस्य और विद्यार्थियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने शोध-पत्रों में लेखकों की भूमिका एवं नामांकन से जुड़े विवाद, सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने का दबाव, शोध अनुदान के अनुचित उपयोग, शोध से संबंधित रिकॉर्ड का सही तरीके से रख-रखाव नहीं करने और शोध की गुणवत्ता के बजाय केवल प्रकाशनों की संख्या पर अत्यधिक जोर देने जैसी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने उचित रिकॉर्ड-कीपिंग, पारदर्शी ऑथरशिप, ईमानदारी, जवाबदेही, निष्पक्षता और शोध संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन पर विशेष जोर दिया।
तीसरे दिन बायोएथिक्स और जिम्मेदार शोध पर जोर
22 अगस्त को IIT इंदौर के डॉ. हेम ज्हा ने ‘बायोएथिक्स इन रिसर्च’ विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि शोध में नैतिक मानकों का दायरा केवल कानूनी आवश्यकताओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने व्यक्तियों के सम्मान, सूचित सहमति, लाभ को अधिकतम करने, संभावित नुकसान को न्यूनतम करने, ओपन साइंस और सहयोगात्मक शोध जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने भारतीय शोध व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की, जिनमें शोध दस्तावेजों का अपर्याप्त रख-रखाव, ऑथरशिप एवं प्रकाशन से जुड़े मुद्दे और शोध की नैतिकता को लेकर प्रभावी मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण की आवश्यकता प्रमुख रही।
तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के दौरान प्रतिभागियों को नैतिक शोध प्रक्रिया, जिम्मेदार ऑथरशिप, प्रकाशन की विश्वसनीयता, शोध दस्तावेजों का रख-रखाव, प्लेजरिज्म से बचाव, जर्नल चयन और अकादमिक प्रकाशन के क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यक्रम की सफलता में एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के प्रबंधन, कुलपति एवं विश्वविद्यालय नेतृत्व के निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल और IQAC ने उनके सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय ने सभी रिसोर्स पर्सन्स, आयोजन समिति के सदस्यों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति भी आभार जताया।
इस तीन दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में कुल 167 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का समापन सकारात्मक माहौल में हुआ और इसके साथ एलएनसीटी यूनिवर्सिटी, भोपाल ने नैतिक, जिम्मेदार और गुणवत्तापूर्ण शोध संस्कृति को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
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