दीपावली पर पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए ग्रीन पटाखों को एक विकल्प के रूप में विकसित किया गया है। हालांकि, ग्रीन पटाखों का मतलब प्रदूषण-मुक्त पटाखे नहीं है। इन्हें विशेष रासायनिक फॉर्मूलेशन के जरिए इस तरह तैयार किया जाता है कि सामान्य पटाखों की तुलना में इनसे कम धुआं, हानिकारक गैसें और सूक्ष्म कण निकलें। लेकिन किसी पटाखे को ग्रीन कहलाने के लिए वैज्ञानिक जांच और निर्धारित मानकों पर खरा उतरना जरूरी है।
1. रासायनिक संरचना में किया जाता है बदलाव
ग्रीन पटाखों में पारंपरिक रसायनों की मात्रा और संरचना को बदला जाता है। इसका उद्देश्य पटाखे के जलने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना और प्रदूषणकारी तत्वों का उत्सर्जन कम करना है। इनमें बेरियम जैसे प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। कुछ फॉर्मूलेशन में विशेष एडिटिव्स का उपयोग भी किया जाता है, जो धूल और सूक्ष्म कणों के उत्सर्जन को कम करने में मदद करते हैं।
2. प्रदूषण में कम से कम 30 प्रतिशत कमी जरूरी
सीएसआईआर-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CSIR-NEERI) के मानकों के अनुसार, ग्रीन पटाखों से सामान्य पटाखों की तुलना में कम से कम 30 प्रतिशत कम पार्टिकुलेट मैटर निकलना चाहिए। दूसरा मानक यह है कि पार्टिकुलेट मैटर में कम से कम 20 प्रतिशत और गैसीय प्रदूषकों में कम से कम 10 प्रतिशत की कमी हो।
3. विशेष चैंबर में होती है जांच
नागपुर स्थित CSIR-NEERI की प्रयोगशाला में पटाखों को नियंत्रित परीक्षण कक्ष में जलाया जाता है। इस दौरान निकलने वाले PM2.5 और PM10 कणों को विशेष उपकरणों से एकत्र किया जाता है। सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसों का भी परीक्षण होता है। इसके बाद परिणामों की तुलना उसी श्रेणी के सामान्य पटाखे से की जाती है।
4. आवाज की भी होती है जांच
ग्रीन पटाखों के परीक्षण में केवल धुएं और गैसों को ही नहीं, बल्कि आवाज को भी मापा जाता है। इसके लिए विशेष श्रेणी के साउंड मीटर का इस्तेमाल किया जाता है, जो पटाखे के अचानक होने वाले तेज धमाके को रिकॉर्ड कर सकता है। निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना भी जरूरी है।
5. प्रमाणन के बाद ही मिलता है ग्रीन दर्जा
पटाखा निर्माता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने उत्पादों का परीक्षण कराना होता है। निर्माता के पास पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) का आवश्यक लाइसेंस होना चाहिए। CSIR-NEERI की ओर से पंजीकृत निर्माताओं और स्वीकृत उत्पादों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। पैकेट पर दिए गए QR कोड के जरिए उत्पाद और निर्माता से जुड़ी जानकारी की पुष्टि की जा सकती है।
ग्रीन का मतलब पूरी तरह सुरक्षित नहीं
विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं, लेकिन उनसे धुआं, धूल और शोर फिर भी निकलता है। इसलिए इन्हें पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल या स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित मानना सही नहीं है। दीपावली पर कम पटाखे जलाना और रोशनी के पारंपरिक विकल्पों को प्राथमिकता देना प्रदूषण कम करने की दिशा में अधिक प्रभावी कदम हो सकता है।
Hashtags: #ScienceTechnology #Bhopal #ग्रीन #पटाखे #कैसे #पाते #सर्टिफिकेट #जानिए #इसके #ग्रीनपटाखेकैसेपाते