सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत के जल संसाधनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट ने चिंता बढ़ाई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की State of Global Water Resources 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। इसकी बड़ी वजह जरूरत से ज्यादा भूजल निकालना बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 से 2025 के दौरान भारत समेत कई क्षेत्रों में लगातार भूजल घाटा दर्ज किया गया। यानी जितना पानी जमीन से निकाला जा रहा है, उसकी तुलना में प्राकृतिक रूप से भूजल का पुनर्भरण कम हो रहा है। WMO ने इसे जल संतुलन में गंभीर बदलाव का संकेत माना है।

भारत सरकार के 2025 के भूजल आकलन के अनुसार देश में सालाना करीब 448.52 अरब घन मीटर भूजल रिचार्ज होता है, जबकि निकासी योग्य संसाधन करीब 407.75 अरब घन मीटर और कुल भूजल निकासी 247.22 अरब घन मीटर रही। देश के 6,762 आकलन क्षेत्रों में 730 को ओवर-एक्सप्लॉइटेड श्रेणी में रखा गया है। भारत में भूजल का सबसे बड़ा इस्तेमाल सिंचाई में होता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल भूजल निकासी का करीब 87 प्रतिशत हिस्सा कृषि में जाता है। ऐसे में अत्यधिक दोहन रोकना, वर्षा जल संचयन बढ़ाना, माइक्रो-इरिगेशन अपनाना और भूजल पुनर्भरण पर जोर देना जल संतुलन सुधारने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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