सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : AI का इस्तेमाल कहीं आपकी कंपनी को खतरे में तो नहीं डाल रहा?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से कंपनियों और दफ्तरों में बढ़ रहा है। इससे काम आसान और तेज हो रहा है, लेकिन बिना उचित सुरक्षा और नीतियों के AI टूल्स का इस्तेमाल कंपनियों के लिए डेटा प्राइवेसी, साइबर सिक्योरिटी और कानूनी जोखिम भी पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक AI को अपनाने की रफ्तार कई संगठनों की सुरक्षा और गवर्नेंस व्यवस्था से आगे निकल रही है।
कंपनियों में सबसे बड़ी चिंता संवेदनशील डेटा के गलत तरीके से साझा होने की है। कर्मचारी अगर कंपनी की गोपनीय जानकारी, ग्राहक डेटा, वित्तीय दस्तावेज या अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं अनधिकृत AI टूल में डालते हैं, तो डेटा के नियंत्रण और सुरक्षा को लेकर जोखिम बढ़ सकता है।
'Shadow AI' भी बन रहा खतराकई कर्मचारी IT विभाग या कंपनी की अनुमति के बिना AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं। इसे 'Shadow AI' कहा जाता है। इससे कंपनियों को यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि कौन-सा डेटा किस AI सिस्टम में जा रहा है और उसका इस्तेमाल किस तरह हो रहा है।
साइबर हमलों का भी बढ़ रहा खतरा AI का इस्तेमाल सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बल्कि साइबर अपराधी भी कर रहे हैं। AI की मदद से फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और अन्य साइबर हमलों को अधिक तेज और प्रभावी बनाया जा सकता है। हाल के महीनों में AI आधारित साइबर खतरों को लेकर टेक कंपनियों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है।
कंपनियों को क्या करना चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार कंपनियों को AI इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नीतियां बनानी चाहिए। कर्मचारियों को यह बताया जाना जरूरी है कि कौन-सा डेटा AI टूल्स में साझा किया जा सकता है और कौन-सी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखनी है। साथ ही AI सिस्टम की निगरानी, डेटा सुरक्षा, एक्सेस कंट्रोल और नियमित जोखिम मूल्यांकन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
AI कंपनी के लिए बड़ा अवसर है, लेकिन बिना सुरक्षा और गवर्नेंस के इसका इस्तेमाल फायदे के बजाय जोखिम भी बन सकता है। इसलिए कंपनियों के लिए जरूरी है कि AI अपनाने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी को भी प्राथमिकता दें।
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