रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूलों में पढ़ाई को अधिक रोचक और प्रभावी बनाने के लिए शिक्षक अब सिंगिंग, पेंटिंग और एक्टिंग जैसी कला विधाओं का सहारा लेंगे। इसी उद्देश्य से कला और संगीत को विभिन्न विषयों की पढ़ाई से जोड़ने के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें 60 शिक्षकों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में शिक्षकों को रचनात्मक तरीकों से विद्यार्थियों तक पाठ्यक्रम पहुंचाने के व्यावहारिक तरीके बताए गए।
कार्यशाला के दौरान बताया गया कि केवल किताबों और पारंपरिक व्याख्यान के माध्यम से पढ़ाने के बजाय कला आधारित गतिविधियों को कक्षा शिक्षण का हिस्सा बनाया जा सकता है। शिक्षक गीतों, चित्रों, नाट्य प्रस्तुतियों और अभिनय के जरिए कठिन विषयों को भी सरल तरीके से समझा सकेंगे। इससे विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के साथ उनकी कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति क्षमता को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रशिक्षण में शिक्षकों को अलग-अलग विषयों के अनुरूप कला गतिविधियों की योजना बनाने और उन्हें पाठ्यक्रम से जोड़ने के तरीके समझाए गए। इसका उद्देश्य कक्षा में बच्चों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना और सीखने की प्रक्रिया को अनुभव आधारित बनाना है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी कला आधारित और गतिविधि-केंद्रित शिक्षा को प्रोत्साहित किया गया है। इस पहल के माध्यम से स्कूलों में पढ़ाई को केवल रटने तक सीमित रखने के बजाय रचनात्मकता, कौशल और व्यवहारिक समझ विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
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