भोपाल । राजधानी की खराब सडकों ने वायु गुणवत्ता सूचकांक बढा दिया है। बरसात के बाद शहर की ज्यादातर मुख्य सडकें खराब हो चुकी है और धूल और धूएं लोगों को बुरा हाल है। शहर में नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और राजधानी परियोजना की मुख्य सड़के ख्रराब हो चुकी है। सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों से निकलने वाला धुआं भी इसके लिए जिम्मेदार है। धूल और धुआं का स्तर बढ़ने की वजह से भोपाल शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 40 से बढ़कर 89 तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी बीते एक सप्ताह में दर्ज की है। शहर में धूल व धुआं का स्तर बढ़ना आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है। बता दें कि वायु गुणवत्ता सूचकांक किसी भी शहर में वायु प्रदूषण के स्तर को दर्शाता है। यह सूचकांक धूल, धुआं, हानिकारक गैसें कार्बन डाइऑक्साइड से मिलकर तैयार होता है। 10 दिन पहले जब बारिश हो रही थी तब भोपाल शहर में धूल का स्तर नगण्य हो गया था लेकिन बारिश थमते ही धूल के मोटे आकार के कण जिन्हें पार्टिकुलेट लेट मेटर पीएम 10 कहा जाता है उनका स्तर 150 क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया है। धूल के बहुत ही सूक्ष्म कन जिन्हें पार्टिकुलेट मैटर पीएम 2.5 कहते हैं उनके स्तर में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि बारिश के दिनों में धूल, धुएं और हानिकारक गैसों के मिश्रण का असर नमी के कारण कम हो जाता है। यदि बारिश हो रही होती है तब तो प्रदूषण न के बराबर दर्ज होता है लेकिन मौसम खुल जाए और शुष्कता सामान्य से नीचे हो तो हानिकारक गैसों का मिश्रण और धूल, धुएं के कण परिवे शिय वातावरण में होते हैं। जिनका स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है।मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ इंजीनियर रहे गुणवंत जोशी ने बताया कि यदि किसी भी शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक यदि 50 से नीचे हो तो उस शहर की हवा सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है। यदि सूचकांक 50 से ऊपर बढ़ता है तो इसका मतलब है कि हवा में धूल, धुएं के कण, हानिकारक गैसों का मिश्रण बढ़ रहा है।