आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : वोटिंग से पहले यदि EVM या VVPAT खराब हो जाए तो आप क्या करेंगे?… मतदान से जुड़े कुछ इसी तरह के 25 प्रश्न भोपाल के 9 हजार अधिकारी-कर्मचारियों से पूछे जाएंगे। चुनावी ट्रेनिंग लेने के बाद वे एग्जाम देंगे। यदि फैल हो जाते हैं तो उन्हें दोबारा ट्रेनिंग लेना होगी। भोपाल में विधानसभा चुनाव में यह पहल जिला प्रशासन ने की है। 6 नवंबर से दूसरे फेस की ट्रेनिंग होगी।

सभी प्रश्न ईवीएम, वीवीपैट, मॉकपोल और वोटिंग से जुड़े हैं। इन प्रश्नों का जवाब ट्रेनिंग में पहले से ही मिल जाएगा, लेकिन ट्रेनिंग को लेकर अधिकारी-कर्मचारी कितने गंभीर है, ये एग्जॉम के जरिए जांचा जाएगा। 105 मास्टर ट्रेनर्स कर्मचारियों को ट्रेनिंग देंगे। यही आंसर शीट जांचेंगे।

खुद सीईओ ने तैयार कराए प्रश्न

जिला पंचायत सीईओ ऋतुराज सिंह ने सभी प्रश्न तैयार कराए हैं। इसके बाद एडिशनल सीईओ डॉ. विनोद यादव, सहायक नोडल अधिकारी संदीप श्रीवास्तव, मास्टर ट्रेनर्स आरके शर्मा आदि ने बकायदा प्रश्नपत्र तैयार किया है।

इसलिए पड़ी एग्जॉम की जरूरत

जिले में कुल 2049 मतदान केंद्र हैं। प्रत्येक केंद्र पर चार अधिकारी-कर्मचारी (पीओ, पी-1, पी-2 और पी-3) की ड्यूटी लगेगी। इस हिसाब से कुल 8196 अधिकारी-कर्मचारी हैं। इनके अलावा 10% यानी, 800 से अधिक कर्मचारी रिजर्व के तौर पर रहेंगे। ताकि, जरूरत पड़ने पर उनकी ड्यूटी लगाई जा सके। अफसरों ने बताया कि इस बार कई कर्मचारी ऐसे हैं, जो पहली बार वोटिंग कराएंगे। वे ट्रेनिंग को लेकर कितने गंभीर हैं, यह जांचने के लिए ट्रेनिंग के बाद परीक्षा कराएंगे।

प्रश्नपत्र में ही चार ऑप्शन, एक सही रहेगा

सीईओ ऋतुराज ने बताया कि 6 से 8 नवंबर तक भोपाल के मोतीलाल विज्ञान कॉलेज और महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज में दो-दो सत्र में ट्रेनिंग होगी। एक दिन में करीब 3600 कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग के तुरंत बाद वे 25 प्रश्नों के जवाब देंगे।

प्रश्न पत्र में ही चार उत्तर रहेंगे। इनमें से एक सही होगा। जिस पर ‘राइट’ लगाना होगा। इसके बाद मास्टर ट्रेनर्स आंसरशीट को देखेंगे। यदि प्रश्न गलत निकले तो संबंधित कर्मचारी को दूसरे दिन फिर से ट्रेनिंग में बैठना होगा।

पी-2 और पी-3 के लिए फाइनल ट्रेनिंग

पी-2 और पी-3 यानी मतदान कराने वाले कर्मचारियों के लिए यह फाइनल ट्रेनिंग होगी। इसके बाद उन्हें प्रशिक्षण नहीं मिलेगा। इसलिए उन्हें चुनाव आयोग की पुस्तिका भी दी जाएगी। पीओ यानी पीठासीन अधिकारी और पी-1 यानी मतदान अधिकारी को एक बार फिर 13 और 14 नवंबर को फाइनल ट्रेनिंग दी जाएगी।

किस विधानसभा में ड्यूटी लगेगी, ये भी पता चल जाएगा

ट्रेनिंग के दौरान ही कर्मचारियों को यह पता चल जाएगा कि उनकी किस विधानसभा में ड्यूटी लगेगी। हालांकि, मतदान केंद्र के बारे में उन्हें बाद में ही पता चल सकेगा।

ट्रेनिंग में ये रहेंगे मुख्य बिंदू

ईवीएम और वीवीपैट से मॉक पोल कैसे कराते हैं।

कंट्रोल यूनिट पर प्रदर्शित परिणाम को वीवीपैट के मॉक पोल पर्चियों से मिलान करें।

मॉकपोल के परिणाम को सीयू से क्लियर करना और वीवीपैट ड्राप बॉक्स से मॉल पोल को पर्चियों से हटाना।

वीवीपैट मॉक पोल पेपर पर्चियों के पुष्ठ भाग पर स्टॉम्प लगाकर काले लिफाफे को गुलाबी पेपर मुद्रा से मुहरबंद करना।

मतों की गोपनीयता पर अभ्यर्थियों एवं मतदान अभिकर्ताओं की ब्रीफिंग करना।

मतदान की घोषणा स्पष्ट रूप से करना और अभ्यर्थी/मतदान अभिकर्ता के हस्ताक्षर प्राप्त करना।

मतदान समाप्ति के समय पंक्ति में खड़े व्यक्तियों को नंबर अंकित पर्चियां प्रदान करना।

पंक्ति में खड़े मतदाताओं द्वारा मत देने के बाद क्लोज बटन दबाना है।

ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को उचित बॉक्स में रखकर मुहरबंद करना है।

सांविधिक एवं असंविधिक दस्तावेजों की भी मुहरबंदी करना है।

सभी निर्वाचन सामग्रियों को संग्रहण केंद्र पर जमा करने सुरक्षा काफिले के साथ कैसे जाना है, आदि।