सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने अपने नई दिल्ली स्थित बाबा साहेब आंबेडकर कन्वेंशन सेंटर में 31वां प्रो. जी. राम रेड्डी स्मृति व्याख्यान आयोजित किया। यह वार्षिक स्मृति व्याख्यान इग्नू के संस्थापक कुलपति प्रो. जी. राम रेड्डी के सम्मान में आयोजित किया जाता है, जिनके दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा (ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग-ODL) प्रणाली की नींव रखी और उच्च शिक्षा के स्वरूप को नई दिशा प्रदान की। इस वर्ष के स्मृति व्याख्यान का विषय था "इग्नू की शिक्षक शिक्षा पहल और भारतीय शिक्षा परिदृश्य में परिवर्तनकारी बदलाव"।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा थे। स्मृति व्याख्यान दिशा ग्लोबल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं वावासन ओपन यूनिवर्सिटी, मलेशिया के पूर्व उप-कुलपति प्रो. मोहनदास बी. मेनन ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इग्नू की कुलपति प्रो. उमा कंजीलाल ने की।
कार्यक्रम में अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए इग्नू के कुलसचिव प्रो. जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि यह स्मृति व्याख्यान प्रो. जी. राम रेड्डी की अमूल्य शैक्षिक विरासत को स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि यह व्याख्यान विश्वविद्यालय के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक आयोजनों में से एक बन चुका है, जो उच्च शिक्षा से जुड़े समकालीन मुद्दों पर गंभीर चिंतन का मंच प्रदान करता है तथा समावेशी, समानतापूर्ण और शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा के प्रति इग्नू की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. जी. राम रेड्डी के जीवन, उनकी दूरदृष्टि और शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान पर आधारित एक प्रेरणादायी लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। फिल्म में इग्नू की स्थापना, भारत तथा विदेशों में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा को बढ़ावा देने तथा लाखों विद्यार्थियों को सशक्त बनाने वाले शैक्षिक आंदोलन की नींव रखने में उनकी अग्रणी भूमिका को दर्शाया गया। इस अवसर पर इग्नू के विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि विश्वविद्यालय की लचीली एवं समावेशी शिक्षा प्रणाली ने उनके जीवन और करियर में किस प्रकार सकारात्मक परिवर्तन लाया।
प्रो. मोहनदास बी. मेनन का व्याख्यान
31वें प्रो. जी. राम रेड्डी स्मृति व्याख्यान में प्रो. मोहनदास बी. मेनन ने प्रो. रेड्डी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को साझा करते हुए कहा कि इग्नू के प्रारंभिक वर्षों में युवा शिक्षाविदों पर जो विश्वास और स्वतंत्रता दिखाई गई, उसी ने विश्वविद्यालय को नवाचार करने तथा उच्च शिक्षा का लोकतंत्रीकरण करने में सक्षम बनाया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में जिन अवधारणाओं—जैसे लचीली शिक्षा, मॉड्यूलर लर्निंग, क्रेडिट संचयन एवं अंतरण, बहुविषयक शिक्षा, शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण तथा आजीवन सीखने—पर बल दिया गया है, वे सभी इग्नू की स्थापना के समय से ही प्रो. जी. राम रेड्डी की शैक्षणिक सोच का अभिन्न हिस्सा रही हैं।

प्रो. मेनन ने शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों के विकास में इग्नू के शिक्षा संकाय की अग्रणी भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण से जोड़ने वाले कार्यक्रम विकसित किए, जिन्होंने दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से देशभर में प्राथमिक शिक्षक शिक्षा को सशक्त बनाया।
उन्होंने शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों के सामने समय-समय पर आई नियामकीय चुनौतियों का भी उल्लेख किया, लेकिन विश्वास व्यक्त किया कि एनईपी-2020 के अंतर्गत प्रस्तावित सुधार नवाचार के नए अवसर उपलब्ध कराते हैं। उनके अनुसार बहुविषयक शिक्षा, लचीली शिक्षण प्रणाली, प्रौद्योगिकी-संचालित शिक्षण और व्यापक शिक्षार्थी सहायता तंत्र के कारण इग्नू एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक राष्ट्रीय प्रयोगशाला की भूमिका निभाने की विशिष्ट क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के लोकतंत्रीकरण में इग्नू की सफलता प्रो. जी. राम रेड्डी की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता को सच्ची श्रद्धांजलि है।
मुख्य अतिथि प्रो. पंकज अरोड़ा का संबोधन
मुख्य अतिथि प्रो. पंकज अरोड़ा ने प्रो. जी. राम रेड्डी को एक दूरदर्शी शिक्षाविद् और संस्थान निर्माता बताते हुए कहा कि उनकी शैक्षिक विचारधारा आज भी भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था को दिशा दे रही है।
उन्होंने कहा कि एनईपी-2020 के जिन प्रमुख सिद्धांतों—लचीलापन, आजीवन शिक्षा, बहुविषयक अध्ययन और विद्यार्थियों की पसंद—पर आज बल दिया जा रहा है, उन्हें इग्नू ने दशकों पहले ही व्यवहार में उतार दिया था।
प्रो. अरोड़ा ने कहा कि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने का एक प्रभावी माध्यम है, क्योंकि यह उन विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुँचाती है जो व्यक्तिगत, सामाजिक अथवा आर्थिक कारणों से पारंपरिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में 50 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करने का राष्ट्रीय लक्ष्य मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के प्रभावी विस्तार के बिना संभव नहीं है।
शिक्षक शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक-शिक्षक तैयार करते हैं और शिक्षक ही राष्ट्र का निर्माण करते हैं। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षक शिक्षा को उभरती प्रौद्योगिकियों और भविष्य की शिक्षण पद्धतियों के अनुरूप पुनर्गठित करना आवश्यक है।
उन्होंने कार्यरत शिक्षकों के लिए सतत मार्गदर्शन मंच विकसित करने, शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के नैतिक उपयोग तथा ऐसी तकनीक-सक्षम शिक्षण व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई, जहाँ एआई शिक्षक का विकल्प नहीं बल्कि सहयोगी उपकरण बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुक्त शिक्षा शैक्षणिक गुणवत्ता को कम नहीं करती, बल्कि शिक्षा तक पहुँच की बाधाओं को कम कर अधिक लोगों के लिए अवसर उपलब्ध कराती है।
कुलपति प्रो. उमा कंजीलाल का अध्यक्षीय उद्बोधन
अपने अध्यक्षीय संबोधन में इग्नू की कुलपति प्रो. उमा कंजीलाल ने प्रो. जी. राम रेड्डी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें दूरदर्शी शिक्षाविद् बताया, जिनके विचार आज भी विश्वविद्यालय के मिशन का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इग्नू का विविधतापूर्ण विद्यार्थी समुदाय समानता, समावेशन और आजीवन शिक्षा के प्रति विश्वविद्यालय की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इग्नू ने लगातार यह सिद्ध किया है कि गुणवत्ता और समावेशिता साथ-साथ आगे बढ़ सकती हैं तथा एनईपी-2020 के उद्देश्य प्रो. जी. राम रेड्डी की शैक्षिक दृष्टि की पुनर्पुष्टि करते हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षक शिक्षा की केंद्रीय भूमिका है और भविष्य के शिक्षकों में विषयगत विशेषज्ञता के साथ संवेदनशीलता, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन और प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग की क्षमता भी होनी चाहिए।
प्रो. कंजीलाल ने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किए जा रहे एआई-सक्षम वर्चुअल लर्निंग वातावरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इग्नू नवाचार आधारित डिजिटल शिक्षा मॉडल के माध्यम से एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान देने की स्थिति में है।
उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि प्रो. जी. राम रेड्डी ने भारत के अतिरिक्त बांग्लादेश और श्रीलंका में भी मुक्त विश्वविद्यालयों एवं मुक्त शिक्षा संस्थानों के विकास में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया, जो उनकी वैश्विक शैक्षिक दृष्टि का प्रमाण है।
पैनल चर्चा
स्मृति व्याख्यान के उपरांत "21वीं सदी के लिए शिक्षक शिक्षा : नवाचार, समावेशन और शिक्षक दक्षता निर्माण" विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रो. मोहनदास बी. मेनन ने की।
इस चर्चा में प्रमुख शिक्षाविदों ने भाग लिया, जिनमें प्रो. करणम पुष्पनाधम, विभागाध्यक्ष, शैक्षिक प्रशासन विभाग, महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा; प्रो. एन. वी. वर्गीज, पूर्व कुलपति, एनआईईपीए तथा विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर, आईआईटी बॉम्बे; तथा प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा, अध्यक्ष, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद, पंचकूला शामिल थे।
प्रो. जी. राम रेड्डी स्मृति व्याख्यान इग्नू के प्रमुख शैक्षणिक आयोजनों में से एक है, जो देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, शिक्षा विशेषज्ञों और अकादमिक समुदाय को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय महत्व के शिक्षा संबंधी विषयों पर सार्थक विमर्श का अवसर प्रदान करता है। साथ ही यह भारत में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के महान शिल्पकार प्रो. जी. राम रेड्डी के स्थायी आदर्शों और योगदान को सम्मानपूर्वक स्मरण करने का अवसर भी है।
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