आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बीजेपी से राज्यसभा सांसद और मप्र के पूर्व प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे विधानसभा चुनाव के चलते भोपाल में हैं। चुनाव में भाजपा से जुड़े कई मुद्दों पर उन्होंने दैनिक भास्कर से चर्चा की। उन्होंने मप्र में अपने प्रभार के दौर के अनुभव और मौजूदा परिस्थितियों पर बेबाकी से जवाब दिए।
पढ़िए विनय सहस्त्रबुद्धे से हुई पूरी बातचीत….
सवाल : पिछले चुनाव में वोट प्रतिशत बीजेपी का ज्यादा था, सीटों के नंबर में आप पीछे रह गए थे। लेकिन जिस तरह से 2020 में सिंधिया जी के साथ विधायक आए और सरकार बनाई। क्या ऐसे 2018 में सरकार नहीं बनाई जा सकती थी?
सहस्त्रबुद्धे : ऐसी बातें If & But के आधार पर नहीं की जा सकती। ज्योतिरादित्य सिंधिया को जो लगा कि वास्तव में जनादेश तो बीजेपी को मिला था। मार्केट में करेक्शन आता है। वैसे करेक्शन की प्रबल आवश्यकता को देखते हुए कोरोना के चुनौती पूर्ण समय में ज्योतिरादित्य जी ने विवेकपूर्ण निर्णय किया। उनके पास जो राजनीतिक बल था वह भाजपा के पाले में डाल दिया। ज्योतिरादित्य और उनके मित्रों ने जो निर्णय किया उसके कारण सरकार आई।
सवाल : 2018 में कई विधायक आपको समर्थन देने के लिए तैयार थे। फिर सरकार क्यों नहीं बनाई?
सहस्त्रबुद्धे : ऐसा नहीं था। उस समय भी मैं यहां पर प्रभारी के रूप में काम कर रहा था। 7-8 सीटें कम मिली तो जोड़-तोड़ करने के बजाय हमने विपक्ष में रहना पसंद किया। यह हमारी सोची-समझी दृष्टि का सामूहिक एक विचार था। उसके आधार पर शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता को त्याग दिया और कमलनाथ की सरकार बन गई थी।