आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इंदौर में इस बार विजया दशमी पर एक अनोखा आयोजन होने जा रहा है। शहरभर में जहां बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन होगा वहीं एक स्थान पर शूर्पणखा का भी दहन किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि शूर्पणखा का झूठ ही वह कारण था जिस कारण राम-रावण का युद्ध हुआ। आज की कुछ संस्कारहीन महिलाएं भी यही कर रही है। वह शूर्पणखा के समाान अपने माता-पिता, भाइयों, पुलिस को और कोर्ट में अपने पर हुए अत्याचार की झूठी कहानी बता रही है। परिणाम स्वरूप घर बर्बाद हो रहे हैं और मर्दों को कोर्ट में बार-बार प्रताड़ित होना पड़ता है।

यह आयोजन महिला कानून के दुरुपयोगों के विरोध में लड़ाई करने वली संस्था पौरुष (पीपुल अगेन्स्ट अनइक्वल रुल्स यूस्ड शेल्टर हेरासमेंट) द्वारा किया जा रहा है। उक्त संस्था सालों से उन पुरुष पीड़ितों के लिए काम कर रही है जिन पर अकारण दहेज, दहेज हत्या, भरण-पोषण आदि के झूठे केस किए जाते हैं। शूर्पणखा का पुतला दहन 23 अक्टूबर को महालक्ष्मी नगर, मेला ग्राउण्ड पर शाम 5 बजे होगा। संस्था अध्यक्ष अशोक दशोरा ने बताया कि रामायण में शूर्पणखा का झूठ ही वह कारण था जिस कारण राम-रावण का युद्ध हुआ। ऐसे में शूर्पणखा का पुतला दहन किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया यह विरोध संपूर्ण नारियों के नहीं बल्कि उन संस्कारहीन महिलाओं के विरोध में है जो महिला कानूनों का दुरुपयोग कर रही है।

अब हर साल करेंगे शूर्पणखा का दहन

संस्था के प्रदेश संयोजक प्रदीप मेश्राम, मिलिंद अग्रवाल व ईश्वर मंडलोई ने बताया कि रामायण में बताया गया है शूर्पणखा ने भाई रावण को अपनी अनैतिकता को छुपाते हुए झूठ बोला था कि मैं तो विश्व सुंदरी सीता को देखने गई थी किन्तु लक्ष्मण ने मेरे नाक काट दी। आज की कुछ पढ़ी-लिखी मॉडर्न शूर्पणखाएं भी अपने भाई और पिताओं को दहेज मांगने की झूठी कहानी बताकर पति सहित पूरे ससुराल पक्ष पर दहेज, दहेज हत्या, घरेलू हिंसा, बलात्कार, छेड़छाड़, भरण पोषण, क्रूरता आदि की रिपोर्ट दर्ज कराती हैं। इससे प्रताड़ित होकर हर साल करीब डेढ़ लाख पुरुष आत्महत्या कर रहे हैं। इसी प्रताड़ना, पीड़ा, अन्याय एवं अत्याचार के खिलाफ शूर्पणखा दहन का यह आयोजन किया गया है जो अब हर साल होगा। हमारा उद्देश्य समाज के सामने सच्चाई लाना और गलत परम्परा को खत्म किया जा सके। जब तक समाज की है विचारधारा नहीं बदलेगी जब तक परिवर्तन नहीं आएगा। विचारधारा बदलने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रमों का होना आवश्यक है। संस्था ने पुरुषार्थ साथियों से अपील की है कि कि इस कार्यक्रम में शिरकत करें।

दशानन की तरह 10 दुर्गुणों का किया जिक्र

आयोजकों ने शूर्पणखा का यह पुतला मालवा मील स्थित एक दुकान से करवाया है जहां सालों से रावण के पुतले बनाए जाते हैं। वहां जब शूर्पणखा का पुतला बनाने का ऑर्डर दिया गया तो कारीगर भी हैरान रह गए। फिर डमी रावण की तरह शूर्पणखा का पुतला बनाया गया और महिला के वस्त्र सजाए गए। इसके साथ ही दशानन की तरह शूर्पणखा के भी 10 सिर बनवाए हैं। पोस्टर पर इस आयोजन की जानकारी के साथ संस्कारहीन महिलाओं के दुर्गुण 10 चेहरों में बताए गए हैं। दुर्गुणों में घरेलू हिंसनी, विश्वासघातिनी, दहेज क्रूरनी, दहेज प्रतिशोधिनी, व्यभिचारिणी, धूर्तिणी, भरण पोषिणी, बच्चा चोरनी, भत्ता भिखारिणी आदि बताए गए हैं।