सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: वनमाली कथा समारोह के अंतर्गत आयोजित किए जा रहे दो दिवसीय टैगोर नाट्योत्सव का आगाज शाम के सत्र में हुआ। इसमें वनमाली की कहानियों पर आधारित नाटक ‘दधीचि’ की नाट्य प्रस्तुति ‘रंगशीर्ष’ संस्था के कलाकारों द्वारा निर्देशक संजय मेहता के निर्देशन में दी गई। इसमें उन्होंने वनमाली जी के जीवन और विचारों को उनकी लिखी कहानी ‘रेल का डिब्बा’, ‘आदमी और कुत्ता’ व ‘जिल्दसाज’ को नाटक ‘दधीचि’ में पिरोकर पेश किया।

नाटक ‘दधीचि’ की कहानी

नाटक की शुरुआत दो सूत्रधारों द्वारा वनमाली का जीवन वृत्तांत बताने से होती है जिसमें उनके शिक्षक जीवन और आदर्श विचारों की झलक मिलती है। इसी कड़ी में सूत्रधार उनकी तीन कहानियों का जिक्र करते हैं जो जीवन की आवश्यक सीख देती हैं। शुरुआत ‘रेल के डिब्बे’ से होती है जहां कुछ टिकट लेकर चलने वाले लोग बिना टिकट वालों को बैठने की जगह तक नहीं देते हैं।

यह पैसे वालों और गरीबों के बीच की दुनिया के अंतर को दिखाता है। इसके बाद ‘आदमी और कुत्ता’ कहानी में 3 सिंधी शरणार्थी बहुत सारा सामान ट्रेन में ले जा रहे हैं। इस सामान का किराया बचाने के लिए उन्होंने इसकी टिकट लेने के बजाए टी.सी. और पुलिस वाले को घूस दी हुई है। जब ट्रेन में लोग उनसे पूछते हैं कि बैठने की जगह पर सामान क्यों रखा हुआ है तो वे गर्व से बताते हैं कि हमने घूस देकर सामान रखवाया है।

वे आदमी को उसके स्वार्थी प्रकृति के कारण कुत्ता मानते हैं और उन्हें लगता है प्रत्येक आदमी पैसे का लोभी है। उनके इस विचार को ट्रेन का एक यात्री तोड़ता है जो अपनी जेब से पैसे देकर उनके सामान का पूरा टिकट बनवाता है। तीसरी कहानी ‘जिल्दसाज’ में एक बेहतरीन जिल्द बांधने वाले को दर्शाया गया है जो व्यवहार से अकड़ू है।

उसके पास एक दिन एक गरीब महिला अपने बेटे की किताब की जिल्द बंधवाने आती है। तब वह महिला के अत्यधिक निवेदन पर कम पैसों में जिल्द बांधने को राजी हो जाता है। बाद में वह उस महिला के प्रेम में पड़ जाता है और शादी के लिए आग्रह कर देता है। परंतु महिला उसे इंकार कर देती है। नाटक के अंत में सूत्रधार बताते हैं वनमाली ने जीवन भर साहित्य और कला की सेवा की। जिस प्रकार दधीचि ने अपनी हड्डियों का दान कर देवताओं को अस्त्र प्रदान किया उसी प्रकार वनमाली अपना जीवन खपाकर साहित्य और कलाओं की सेवा और इन्हें लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।