सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने की शांति के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर सैन्य टकराव शुरू हो गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जवान इन लॉन्चरों से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें पहुंचाने वाले रॉकेट दागने की तैयारी कर रहे थे।
अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने इस कार्रवाई को सीमित और सटीक सैन्य हमला बताया है। यह जुलाई के अंत के बाद ईरान पर अमेरिका की पहली सार्वजनिक रूप से पुष्टि की गई सैन्य कार्रवाई है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को बाधित होने से रोकना इस कार्रवाई का प्रमुख उद्देश्य था।
लारक द्वीप पर हमले के बाद ईरान ने अमेरिका को जवाब देने की चेतावनी दी और इसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागने का दावा किया। जॉर्डन की सेना ने ईरान की ओर से दागी गई आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की जानकारी दी। हालांकि, ईरानी हमले से अमेरिकी ठिकानों को हुए नुकसान के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां किसी भी लंबे सैन्य संघर्ष से तेल की आपूर्ति, वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है। ताजा हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच ताजा टकराव ने मध्य पूर्व में संघर्ष के फिर व्यापक होने की आशंका बढ़ा दी है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन हमले की स्थिति में निर्णायक जवाब देगा। अब दोनों देशों की अगली सैन्य कार्रवाई पर पूरी दुनिया की नजर है।
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