सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नेपाल ने एक दिन में बदला फैसला, विदेशी मदद पर क्यों हुआ राजी?
नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद अंतरराष्ट्रीय मदद को लेकर सरकार के रुख में महज एक दिन के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 26 अगस्त को नेपाल सरकार ने कहा था कि देश की अपनी सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं और विदेशी सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमों की जरूरत नहीं है। भारत, चीन, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों ने विशेष बचाव दल भेजने की पेशकश की थी, लेकिन काठमांडू ने शुरुआती तौर पर इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया।
इसके बाद हालात की गंभीरता और लगातार बढ़ती चुनौतियों के बीच नेपाल ने सीमित विदेशी विशेषज्ञता लेने का फैसला किया। नेपाल सरकार के अनुसार अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों को कुछ विशेष तकनीकी कार्यों में मदद की अनुमति दी गई है। इनमें सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना, डीएनए के जरिए शवों की पहचान, फोरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी राहत कार्य शामिल हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने स्पष्ट किया है कि देश को सामान्य सर्च-एंड-रेस्क्यू के लिए विदेशी टीमों की नहीं, बल्कि विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत है।
नेपाल के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह विदेशी नागरिकों का बड़ी संख्या में लापता होना भी बताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार बाढ़ के बाद 31 देशों के सैकड़ों विदेशी नागरिक लापता बताए गए। इनमें भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है। कई देशों की सरकारों ने अपने नागरिकों की तलाश और सुरक्षित निकासी के लिए नेपाल से विदेशी विशेषज्ञों को अनुमति देने का आग्रह किया। एक नेपाली अधिकारी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से काफी दबाव आया, जिसके बाद सीमित संख्या में विशेषज्ञों को अनुमति देने का फैसला किया गया।
नेपाल के मीडिया में इस फैसले को लेकर भी काफी चर्चा है। The Kathmandu Postने सरकार के शुरुआती फैसले और उसके बाद हुए बदलाव को प्रमुखता से रिपोर्ट किया है। रिपोर्ट में बताया गया कि विदेशी रेस्क्यू टीमों को अनुमति नहीं देने का फैसला एक दिन भी कायम नहीं रह सका। नेपाली अधिकारियों ने इसके लिए 2015 के भूकंप के अनुभव का भी हवाला दिया, जब बड़ी संख्या में विदेशी बचाव दलों के पहुंचने से समन्वय और प्रबंधन से जुड़ी परेशानियां पैदा हुई थीं। इस बार सरकार ने राहत कार्यों के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया था।
हालांकि नेपाल का कहना है कि यह पूरी तरह विदेशी सहायता स्वीकार करने का यू-टर्न नहीं है। सरकार अभी भी मुख्य सर्च-एंड-रेस्क्यू अभियान नेपाली सेना, पुलिस और अन्य स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से ही चला रही है। विदेशी विशेषज्ञों की मदद केवल उन क्षेत्रों में ली जा रही है, जहां विशेष तकनीकी क्षमता की जरूरत है। इस बदलाव को नेपाल की व्यावहारिक जरूरत और बदलते जमीनी हालात के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
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