सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन लॉन्चरों का इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें पहुंचाने वाले रॉकेट दागने के लिए किए जाने की तैयारी थी। यह जुलाई के बाद ईरानी क्षेत्र पर अमेरिका की पहली पुष्टि की गई सैन्य कार्रवाई है।
अमेरिकी हमले के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया। IRGC के मुताबिक, उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में मौजूद किंग हुसैन और अल-अज्राक अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। ईरान ने इसे लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले का जवाब बताया है।
जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। शुरुआती रिपोर्टों में दोनों अमेरिकी ठिकानों पर किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। वहीं ईरानी पक्ष ने अमेरिकी सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाने का दावा किया है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका का कहना है कि लारक द्वीप पर कार्रवाई का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री मार्गों की सुरक्षा करना था। होर्मुज दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है, इसलिए यहां सैन्य तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है। ताजा घटनाक्रम के बाद तेल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है।
लारक द्वीप पर हमले और उसके बाद ईरानी जवाबी कार्रवाई ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के और व्यापक होने की आशंका बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच जवाबी हमलों का यह नया दौर मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी बड़ी चिंता बन गया है।
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