सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप पर दो IRGC रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन लॉन्चरों से होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें तैनात करने की तैयारी की जा रही थी। अमेरिका ने इस कार्रवाई को सीमित और सटीक सैन्य अभियान बताया।

अमेरिकी हमले के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया। ईरानी मीडिया के अनुसार, IRGC ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों किंग हुसैन और अल-अज्राक को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरान ने इसे लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले का जवाब बताया।

जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने देश के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। ईरानी पक्ष ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अमेरिका का कहना है कि लारक द्वीप पर कार्रवाई का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित ईरानी माइन बिछाने की गतिविधि को रोकना था। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ताजा सैन्य टकराव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई।

इस नए घटनाक्रम ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के और व्यापक होने की आशंका बढ़ा दी है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अब दोनों देशों की अगली सैन्य कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।


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