सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र , भोपाल में लेसन्स इन इम्म्युनोलॉजी फॉर डेवलपिंग इम्म्युनोडा यग्नोस्टिक्स एंड वैक्सीन” विषय पर को इंडियन इम्म्युनोलॉजी सोसाइटी के तत्वाधान में दो दिवसीय सीएमई एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) नरेंद्र कोतवाल, कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ एम्स भोपाल एवं विशिष्ट अतिथि माधवनंद कर, निदेशक एम्स दरभंगा, राजनारायण तिवारी, निदेशक निरेह, भोपाल, जेएनयू के भूतपूर्व संतोष कुमार कर एवं सुमेधा कोतवाल शामिल हुए।
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने अपने स्वागत उदबोधन में कहा कि आज जिस जमाने में हम जी रहे हैं वह इनोवेशन्स, इम्म्युनोडायग्नोस्टिक्स और विकास का समय है। बीएमएचआरसी संस्थान यूनिक हब एंड स्पोक मॉडल पर काम कर रहा है। हमारे 8 सामुदायिक केंद्र शहर के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिनमें गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके आश्रितों को निःशुल्क दवाएं और उपचार प्रदान किया जाता है। साथ ही आयुष्मान कार्ड धारक और गरीबी रेखा के मरीजों का भी इलाज किया जाता है। एम्स की तर्ज पर संस्थान में भी मरीजों के डाटा को ई-सुश्रुत सॉफ्टवेयर से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे डायग्नोस्टिक्स सुविधाओं को बेहतर किया जा सकता है। सिकिल सेल एनीमिया और टीबी उन्मूलन की दिशा में कार्य जारी है। किडनी मरीजों के जीवन में गुणवत्ता सुधार की दृष्टि से मेंटेनेंस डायलिलिस की सुविधा दे रहे हैं । आगे उन्होने कहा कि हम निरंतर नए आयाम और रिसर्च के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। मेक इन इंडिया आज के युवाओं का समय है, आगे बढ़िए-चुनौतियों का सामना करिए, इसी से आपका भविष्य उजव्वल होगा। बेसिक इम्म्युनोलॉजी से ट्रांसलेशनल रिसर्च तक की यात्रा को समझने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन शोधार्थियों के लिये बहुत ही उत्कृष्ट अवसर है।
मुख्य अतिथि नरेंद्र कोतवाल, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल ने सभागार को संबोधित करते हुए कहा कि इम्म्युनोलॉजी के दो आधारभूत स्तंभों- डायग्नोस व ट्रीटमेंट , पर आधारित यह कार्यशाला शोधार्थियों के लिए बहुत उपयोगी है। द्वारा लगभग 14 बीमारियों से बचाव के लिए बनाई गई वैक्सीन से पिछले 50 सालों में 6 जीवन प्रति मिनिट बचाए जा रहे हैं। आगे उन्होने कहा कि विज्ञान से मिलने वाले लाभ असाधारण हैं जैसे कि विज्ञान वैक्सीन का निर्माण करती है पर यह लोगों पर उनके विश्वास पर ही सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करती है। नरेंद्र ने शोधार्थियों से सफलता का सूत्र साझा करते हुये कहा कि अनुसंधान के क्षेत्र में ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, विश्वसनीयता, जोश व निष्काम कर्म के साथ मेहनत करने का मंत्र ही उन्हे सफलता दिला सकता है।
माधवनन्द कर ने “इम्म्युनोडायग्नोस्टिक्स-द लेंड स्केप फॉर फ्यूचर थेरेपटिक्स” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि सही समय पर मरीज का सही डायग्नोस कर समय पर दवा और उपचार देना ही प्राथमिकता होना चाहिए। वर्तमान में विकसित डायग्नोस्टिक विधा आने से बीमारी का सटीक डायग्नोस होने से इलाज करना आसान हो जाता है। आप जिस क्षेत्र में काम करे हैं उस क्षेत्र में समर्पित भाव से कुछ नया सीखने के साथ ही रिसर्च के क्षेत्र में काम करना सुखद अनुभूति देता है। रिसर्च की दिशा में सहभागिता बहुत जरूरी है। अपनी दिमागी सक्रियता के साथ प्रेरित होकर अनुसंधान में योगदान देना महत्वपूर्ण है।
जेएनयू के भूतपूर्व संतोष कुमार कर ने “इवोल्यूशन ऑफ द इम्म्युन सिस्टम” विषय पर अपने वक्तव्य में कहा कि आज से 25 साल पहले इम्म्युनोलॉजी-बायोटेक्नोलॉजी सेंटर स्थापित किया गया था और वर्तमान में इम्म्युनोलॉजी से सभी लोग परिचित हैं। आज करीब 1600 यूनिवर्सिटी में इम्म्युनोलॉजी विषय पढ़ाया जा रहा है। नारी शक्ति को महत्व देते हुए उन्होने कहा कि अगर आप एक बच्ची को शिक्षित करते हैं तो आप एक पूरी जेनेरेशन को शिक्षित कर रहे हैं। आज की हेंड्स-ऑन सीएमई कार्यशाला का उद्देश्य सक्रिय जीवन शैली को बढ़ावा देना है। आगे उन्होने कहा कि जिस प्रकार वायरस में बदलाव से नए –नए रोगों की संख्या बढ़ रही है, उसी प्रकार हमें भी इन रोगों से लड़ने के लिए अपनी जीवन-शैली में बदलावकर इम्म्युनिटी बढ़ानी होगी।
राजनारायण तिवारी, निदेशक, निरेह भोपाल ने सभागार को संबोधित करते हुए बताया कि पहले वैक्सीन/इम्युनिटी का कॉन्सेप्ट संचारी रोगों के लिए आता था। बाद में ये महसूस किया गया कि संचारी रोग लगभग समाप्त हो गए हैं, लेकिन कोविड ने यह भ्रांति दूर कर दी है। आज के परिप्रेक्ष्य में देखे तो इम्म्युनोडायग्नोस्टिक्स विधा केवल संचारी रोग तक सीमित नहीं है, उसका क्षेत्र वृहद हो चुका है। अब गैर संचारी-रोगों के लिए भी अप्रत्यक्ष रूप से इम्म्युन सिस्टम दुरुस्त रखना होगा।
आईआईटी इंदौर से आए अविनाश सोनवाने ने “हेल्थ केयर इनोवेशन्स-नोवल डायग्नोस्टिक एंड थेरेपटिक टेक्नोलोजी पर व्याख्यान दिया। कार्यशाला में लगभग 75 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों और विषय विशेषज्ञों के बीच समूह चर्चा की गई।
दो दिवसीय व्याख्यानमाला के दिन आईआईएसईआर, भोपाल के हिमांशु कुमार “प्रिंसिपल्स एंड बायोलॉजी ऑफ ऑटोइम्म्युन डिसीज डायग्नोसिस” विषय पर व्याख्यान देंगे। जेएनयू के भूतपूर्व संतोष कुमार कर द्वारा “3D प्यूरिफिकेशन ऑफ इम्म्यूनोग्लोबूलिन्स” विषय पर व्याख्यान दिया जाएगा।
कार्यशाला के अंत में पुनीत गांधी, विभागाध्यक्ष अनुसंधान विभाग, बीएमएचआरसी ने उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों, अधिकारियों व शोधार्थियों का आभार व्यक्त किया।
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