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अमेरिका में परिवार का आकार अब आर्थिक हैसियत से जुड़ता नजर आ रहा है। जहां मध्यम और सामान्य आय वाले परिवार बढ़ती महंगाई, बच्चों की देखभाल और शिक्षा के खर्च के कारण दो बच्चों तक परिवार सीमित रख रहे हैं, वहीं देश के सबसे अमीर परिवारों में तीन या उससे अधिक बच्चे होने का चलन अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे रहा है। एक नए विश्लेषण के मुताबिक, तीसरा बच्चा रखना अब संपन्न परिवारों के लिए आर्थिक सामर्थ्य और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बनता जा रहा है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सर्वे ऑफ कंज्यूमर फाइनेंस के 2013 से 2025 तक के आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया कि देश के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले शीर्ष एक प्रतिशत परिवारों में 49 प्रतिशत के कम से कम तीन बच्चे हैं। वहीं, बाकी शीर्ष 10 प्रतिशत आय वर्ग के परिवारों में यह आंकड़ा लगभग 40 प्रतिशत है। संपत्ति के आधार पर देखें तो सबसे अमीर एक प्रतिशत परिवारों में करीब 50 प्रतिशत के तीन या अधिक बच्चे हैं।

बच्चों की परवरिश पर भारी खर्च विश्लेषण के अनुसार, तीसरा बच्चा होने पर परिवार का आर्थिक बोझ काफी बढ़ जाता है। खासतौर पर डे-केयर, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और बड़े घर की जरूरतों पर खर्च बढ़ता है। अमेरिका में बच्चों की देखभाल की औसत वार्षिक लागत 13,184 डॉलर प्रति बच्चा बताई गई है। शहरी क्षेत्रों में यह खर्च 20 हजार डॉलर सालाना से भी अधिक हो सकता है। ऐसे में संपन्न परिवार बच्चों की देखभाल के लिए अतिरिक्त सहायता और सुविधाएं जुटाने में अधिक सक्षम होते हैं।

अर्थशास्त्री माइक कोंजल के विश्लेषण में 45 से 64 वर्ष की आयु वाले परिवारों के आंकड़ों को शामिल किया गया। इसमें जैविक, गोद लिए गए और सौतेले बच्चों को भी गिना गया है। कुछ विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि पुनर्विवाह और सौतेले बच्चों के कारण आंकड़ों की व्याख्या प्रभावित हो सकती है।

बड़ा परिवार चाहते हैं अमेरिकी नागरिक दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका में बड़े परिवार की इच्छा रखने वालों की संख्या भी कम नहीं है। वर्ष 2025 के गैलप सर्वे के अनुसार, 42 प्रतिशत अमेरिकी आदर्श रूप से तीन या उससे अधिक बच्चे चाहते हैं। हालांकि, वास्तविकता में औसतन महिलाओं के 1.6 बच्चे हैं, जबकि लोगों की आदर्श पारिवारिक इच्छा का औसत 2.7 बच्चे है। इस अंतर की प्रमुख वजहों में बच्चों की परवरिश का बढ़ता खर्च, आवास की महंगाई और कामकाजी जीवन की चुनौतियां शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, परिवार का आकार केवल व्यक्तिगत पसंद का विषय नहीं रह गया है, बल्कि आर्थिक संसाधनों से भी गहराई से जुड़ता जा रहा है।


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