सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: सहारा में मिला 4.1 अरब साल पुराना मंगल ग्रह का पत्थर, पानी के मिले संकेत
सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल: सहारा रेगिस्तान में मिला गुलाबी रंग का एक पत्थर वैज्ञानिकों के लिए बड़ी खोज साबित हुआ है। करीब 800 ग्राम वजनी यह पत्थर दरअसल मंगल ग्रह का उल्कापिंड है, जिसकी उम्र 4.1 अरब साल से अधिक बताई गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसमें प्राचीन मंगल ग्रह पर पानी की मौजूदगी और चट्टानों के साथ उसकी परस्पर क्रिया के महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। इस खोज से लाल ग्रह के शुरुआती भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने में मदद मिल सकती है।
इस उल्कापिंड को वर्ष 2022 में माली के सहारा क्षेत्र में स्थित तेघाजा नमक मैदान के पास खोजा गया था। इसी स्थान के नाम पर इसका नाम ‘तेघाजा 001’ रखा गया है। शुरुआत में इसकी वास्तविक उम्र और उत्पत्ति स्पष्ट नहीं थी। बाद में वैज्ञानिकों ने इसके खनिजों और ऑक्सीजन आइसोटोप का विश्लेषण किया, जिससे पुष्टि हुई कि यह मंगल ग्रह से आया है।
नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी से जुड़े वैज्ञानिकों ने जिरकॉन क्रिस्टल सहित विभिन्न खनिजों का अध्ययन कर इसकी उम्र निर्धारित की। शोध में पाया गया कि इस चट्टान में लगभग 4.1 अरब साल पहले मंगल ग्रह के पानी के कारण बदलाव आया था। इससे संकेत मिलता है कि उस दौर में मंगल की सतह और उसकी आंतरिक परतों में पानी की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह उल्कापिंड मंगल की प्राचीन पपड़ी का दुर्लभ नमूना है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि कभी ठंडे और शुष्क ग्रह में पानी का चक्र कैसा था। हालांकि, वैज्ञानिक अभी इसके मंगल ग्रह पर वास्तविक उत्पत्ति स्थल का सटीक पता नहीं लगा पाए हैं।
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