सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: यरुशलम। इजरायल में हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में कथित विदेशी हस्तक्षेप की जांच अब और व्यापक हो गई है। घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के अनुरोध पर विदेशी खुफिया एजेंसी मोसाद भी जांच में शामिल हो गई है। जांच में कतर और तुर्की की कथित भूमिका की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, दोनों देशों ने इजरायल के चुनाव को प्रभावित करने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या विदेशी स्रोतों से धन पहुंचाकर मतदाताओं के व्यवहार और मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी।

कतर और तुर्की पर क्या हैं आरोप? इजरायली मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, जांच में इस आशंका पर ध्यान दिया जा रहा है कि कतर से बड़ी रकम इजरायल में कुछ संगठनों तक पहुंचाई गई, ताकि अरब मतदाताओं की भागीदारी और मतदान को प्रभावित किया जा सके। तुर्की की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। मोसाद को विशेष रूप से विदेशी सरकारों से जुड़े खुफिया पहलुओं की पड़ताल में मदद के लिए शामिल किया गया है।

कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने आरोपों को भ्रामक प्रचार बताते हुए कहा कि इजरायली नेताओं और मीडिया के कुछ लोगों की ओर से कतर को अपने घरेलू राजनीतिक विवादों में घसीटा जा रहा है। तुर्की ने भी इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह जनता की राय को प्रभावित करने का प्रयास है।

चुनाव समिति ने जांच को बताया सीमित इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नोआम सोलबर्ग ने शिन बेट प्रमुख डेविड जिनी को विदेशी हस्तक्षेप की आशंकाओं की जांच करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऐसे आरोपों की गंभीरता से जांच जरूरी है। जांच के निष्कर्ष एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है।

हालांकि, चुनाव समिति ने स्पष्ट किया है कि जांच का अर्थ यह नहीं है कि पूरे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा हो गया है। समिति के कार्यवाहक महानिदेशक डीन लिवने के अनुसार, मतदान केंद्रों पर चुनावी प्रक्रिया कानून के अनुरूप हुई और व्यवस्थित स्तर पर चुनावी अनियमितताओं के दावों का फिलहाल कोई आधार नहीं है। शिन बेट ने भी कहा है कि जांच सीमित दायरे में है और इसका उद्देश्य किसी पूरे समुदाय को संदेह के घेरे में लाना नहीं है।

नेतन्याहू के गठबंधन को नहीं मिला बहुमत 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद इजरायल की संसद नेसेट में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि विपक्षी खेमे को 48 सीटें हासिल हुईं। सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय संसद में 61 सीटों की जरूरत है। अरब दलों ने मिलकर 19 सीटें हासिल की हैं, जिससे सरकार गठन की राजनीतिक प्रक्रिया में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप की जांच को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल कर परिणामों की वैधता पर सवाल उठाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। वहीं, इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने भी कहा है कि किसी पूरे समुदाय को चुनावी आरोपों के आधार पर निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।


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