सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल:
चीन अब मशीनों, तकनीक और अहम औद्योगिक उपकरणों की आपूर्ति को रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ा रहा है। इसका असर भारत की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से लेकर अमेरिका की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री तक दिखाई दे रहा है। बीजिंग ने हाल के दिनों में सुरंग खोदने वाली मशीनों और एआई से जुड़ी तकनीकों के निर्यात पर नए नियंत्रणों की घोषणा की है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) को लेकर है। ये विशाल मशीनें मेट्रो, रेलवे, सड़क और पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग बनाने के काम आती हैं। चीन ने 19 अक्टूबर को घोषणा की कि कुछ विशेष श्रेणी की टीबीएम, उनके महत्वपूर्ण पुर्जों और संबंधित तकनीक के निर्यात के लिए लाइसेंस लेना होगा। ये नियम 18 नवंबर 2026 से लागू होंगे।
भारत पहले भी ऐसी आपूर्ति संबंधी अड़चनों का सामना कर चुका है। वर्ष 2024 में जर्मन कंपनी हेरेनकनेख्ट द्वारा चीन में निर्मित मशीनों की भारत को आपूर्ति में सीमा शुल्क संबंधी देरी हुई थी। ये मशीनें मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए उपयोगी हैं। हालांकि, नए नियमों में भारत का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है और इनके वास्तविक प्रभाव का पता लाइसेंस प्रक्रिया से चलेगा।
दूसरी ओर, चीन ने एआई से जुड़ी 23 तकनीकों को भी निर्यात नियंत्रण सूची में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। इनमें उन्नत एआई मॉडल, ऑटोनॉमस एजेंट, चिप डिजाइन उपकरण और बड़े कंप्यूटिंग सिस्टम चलाने की तकनीक शामिल हैं। इससे अमेरिकी कंपनियों और वैश्विक एआई उद्योग की चीन पर निर्भरता तथा तकनीकी प्रतिस्पर्धा को लेकर नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
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