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कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा होलिका दहन के संदर्भ में जारी एसओपी निर्देश का हवाला देते हुए बताया है कि जिले में होली पर्व के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक सद्भाव के उद्देश्य से गो-काष्ठ आधारित होलिका दहन को प्रोत्साहित किया जाएगा।
निर्देशानुसार जन सहयोग एवं सामाजिक सहभागिता के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि होलिका दहन में लकड़ी के स्थान पर गो-काष्ठ (उपले) का अधिकतम उपयोग हो। साथ ही प्राकृतिक एवं हर्बल रंगों से होली खेलने, जल संरक्षण करने तथा पशु-पक्षियों पर रंग न डालने के संकल्प के साथ स्वच्छ और स्वस्थ होली अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए।
प्रशासन द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश
जिले में आयोजित होने वाले सभी सार्वजनिक होलिका दहन कार्यक्रमों का निःशुल्क पंजीयन कराया जाए। पंजीयन की व्यवस्था जिला मुख्यालय सहित समस्त तहसील, नगरीय निकाय एवं पंचायत स्तर पर सुनिश्चित की जाए।
गो-काष्ठ के उपयोग के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार कर जनसामान्य को लकड़ी के स्थान पर इसके उपयोग हेतु प्रेरित किया जाए।
नगरीय निकायों एवं पंचायत राज संस्थाओं को इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया जाए।
होलिका दहन के दिन संबंधित अधिकारी/कर्मचारी मैदानी अमले के साथ स्थलीय निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि अधिकतम कार्यक्रम गो-काष्ठ आधारित हों।
पूर्णतः गो-काष्ठ आधारित होलिका दहन कार्यक्रमों का सत्यापन कर 2-3 दिवस के भीतर प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत किया जाए। ऐसे आयोजनों का जिला स्तर पर संकलन कर राज्य शासन को प्रतिवेदन भेजा जाए।
पात्र संस्थाओं को जिला स्तरीय सम्मान हेतु प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत किए जाएं। स्वच्छ और स्वस्थ होली अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
राज्य शासन द्वारा भविष्य में ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहन या सहयोग प्रदान करने के संबंध में प्राथमिकता दी जाए।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर अभियान के सफल संचालन हेतु सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण की भावना के साथ गो-काष्ठ आधारित होलिका दहन को अपनाकर स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ होली मनाएं।

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