Photo: Bitter Honey Clicks / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0). Cropped.
दीपावली की शुरुआत में बाजारों और कॉलोनियों में कचरे के ढेर छोड़ने वाली तीन दिन की हड़ताल शुक्रवार देर रात खत्म होने के बाद भोपाल में सफाई फिर शुरू हो गई।
हड़ताल की जड़ वेतन और पक्की नौकरी है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें महीने में करीब 10,500 रुपये मिलते हैं और वे 25 हजार की मांग कर रहे थे। इनमें बड़ी संख्या उन दैनिक वेतनभोगियों की है जो बरसों से नगर निगम में काम कर रहे हैं पर स्थायी पद नहीं मिला। अनुकंपा नियुक्ति और ठेका प्रथा खत्म करना भी मांगों में था।
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के आह्वान पर हड़ताल प्रदेश के कई नगरीय निकायों में फैली। भोपाल में रोज करीब 850 टन कचरा निकलता है। स्थानीय खबरों के अनुसार तीन दिन में लगभग 2,550 टन कचरा जमा हो गया और 400 से ज्यादा कचरा गाड़ियां खड़ी रहीं।
गतिरोध तब टूटा जब राज्य मंत्री कृष्णा गौर के साथ यूनियन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिला। यूनियन प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने कहा कि 10 में से 8 मांगों पर सहमति बनी और नियमितीकरण पर कमेटी बनेगी।
शनिवार की रिपोर्टिंग के मुताबिक शासन पक्ष ने कहा कि विनियमित कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा और 2017 तक के 29 दिवसीय दैनिक वेतनभोगियों का विनियमितीकरण होगा। अकेले भोपाल में इससे करीब 8 हजार दैनिक वेतनभोगी और करीब 1100 विनियमित कर्मी जुड़े बताए जाते हैं; प्रदेशभर में संख्या एक लाख से ऊपर बताई गई है। ठेका प्रथा और अनुकंपा नियुक्ति के लिए संयुक्त कमेटी भी बननी है।
ये शर्तें यूनियन के बयान और बैठक की समाचार रिपोर्टिंग से आई हैं। सरकार का लिखित आदेश अभी सार्वजनिक नहीं हुआ। हड़ताल खत्म होने के बाद मेयर, कलेक्टर और निगम आयुक्त सफाई अभियान में शामिल हुए। अधिकारियों का दावा है कि 24 घंटे में बैकलॉग साफ हो जाएगा।
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