सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नौकरी के बजाय कारोबार की ओर बढ़ रहे छात्र, 22% ने शुरू किया बिजनेस

नई दिल्ली। देश के कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की करियर संबंधी सोच में बदलाव दिखाई दे रहा है। अब बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने के बजाय अपना कारोबार शुरू करने और रोजगार देने वाला बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी और बेंगलुरु की रेवा यूनिवर्सिटी के सहयोग से तैयार GUESSS India 2025 राष्ट्रीय सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 22 प्रतिशत कॉलेज विद्यार्थी पहले ही अपना कारोबार शुरू कर चुके हैं। वहीं, 43 प्रतिशत विद्यार्थी भविष्य में उद्यमी बनना चाहते हैं। 25 हजार से अधिक विद्यार्थियों पर हुआ सर्वे यह रिपोर्ट 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,200 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों के 25,783 विद्यार्थियों से मिले आंकड़ों पर आधारित है। सर्वे सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कारोबार शुरू करने वाले भारतीय विद्यार्थियों का अनुपात 23 प्रतिशत के वैश्विक औसत के करीब है। इसके अलावा, छात्र उद्यमियों में से 35.5 प्रतिशत ने नियमित बिक्री शुरू होने की जानकारी दी।

सरकारी और बड़ी कंपनियों की नौकरियों में रुचि घटी रिपोर्ट में विद्यार्थियों की करियर प्राथमिकताओं में भी बदलाव दर्ज किया गया है। पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद अपना कारोबार चलाने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों का अनुपात 2023 में 14 प्रतिशत था, जो 2025 में बढ़कर 16.2 प्रतिशत हो गया। इसी अवधि में सरकारी नौकरी पाने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों का अनुपात 12.7 प्रतिशत से घटकर 10.1 प्रतिशत रह गया। वहीं, बड़ी कंपनियों में नौकरी करने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों का अनुपात 31.3 प्रतिशत से कम होकर 27.4 प्रतिशत हो गया। हालांकि, ये आंकड़े करियर प्राथमिकताओं में बदलाव दर्शाते हैं, लेकिन इनके आधार पर नौकरी के अवसरों की कमी को इसका एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता।

आईटी और एआई कारोबार में रुचि रिपोर्ट के अनुसार, विद्यार्थी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल सेवाओं से जुड़े व्यवसायों में विशेष रुचि दिखा रहे हैं। हालांकि, वर्तमान में संचालित छात्र कारोबारों में लगभग 10 प्रतिशत ही डिजिटल क्षेत्र से जुड़े हैं। इससे स्पष्ट होता है कि कारोबार शुरू करने की योजना को वास्तविक व्यवसाय में बदलने के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है।

सर्वे में यह भी सामने आया कि जिन विद्यार्थियों के रिश्तेदारों, दोस्तों, सहपाठियों या शिक्षकों में कोई उद्यमी है, उनके स्वयं कारोबार शुरू करने की संभावना तीन गुना अधिक है। वहीं, कारोबार विकसित कर रहे विद्यार्थियों में से केवल 10 प्रतिशत ने पहली बिक्री हासिल की थी, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 23 प्रतिशत था। विश्वविद्यालयों की भूमिका अहम रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को केवल नौकरी पाने के लिए तैयार करने तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित करें। इसके लिए परिसर में इनक्यूबेशन केंद्र, अनुभवी उद्यमियों का मार्गदर्शन, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कारोबार शुरू करने के शुरुआती अवसर उपलब्ध कराना उपयोगी हो सकता है।

रिपोर्ट का मुख्य संदेश है कि विद्यार्थियों की उद्यमी बनने की इच्छा को सफल व्यवसाय में बदलने के लिए उन्हें सही मार्गदर्शन, व्यावहारिक अनुभव और बाजार तक पहुंच की जरूरत है। इससे युवा स्वयं रोजगार पाने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।


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