सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ Chandigarh : वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब और हरियाणा से प्रदूषण-नियंत्रण योजनाओं की कमियां दूर करने और कटाई के मौसम में धान की पराली जलाने के मामलों पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा है। पर्यावरण मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, आयोग ने 22 अक्टूबर को चंडीगढ़ में अलग-अलग समीक्षा बैठकों में मैदानी प्रवर्तन, फसल-अवशेष प्रबंधन और सर्दियों के वायु प्रदूषण को सीमित करने के लिए उठाए जा रहे अन्य कदमों की समीक्षा की।
पंजाब की समीक्षा में यह देखा गया कि फसल-अवशेष प्रबंधन की मशीनें किसानों को उपलब्ध हैं या नहीं और उनका प्रभावी उपयोग हो रहा है या नहीं। अधिकारियों ने धान के भूसे को इकट्ठा करने, ढुलाई और उपयोग की व्यवस्थाओं के साथ-साथ सैटेलाइट से मिलने वाले आग के अलर्ट की फील्ड असेसमेंट, ड्रोन और कम लागत वाले सेंसर के जरिए जांच की व्यवस्था भी परखी।
दोनों राज्यों में आयोग ने ईंट-भट्ठों में भूसा-आधारित बायोमास पेलेट या ब्रिकेट के इस्तेमाल और ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास को-फायरिंग लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा की। आयोग ने आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने को कहा, ताकि धान के भूसे को जलाने के बजाय संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
हरियाणा की समीक्षा में वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण और सड़कों, खुले क्षेत्रों तथा निर्माण स्थलों से उठने वाली धूल के मुद्दे भी शामिल रहे। चर्चा में ईंधन और CNG स्टेशनों पर प्रदूषण प्रमाणपत्र की अनिवार्यता लागू कराने के लिए नंबर-प्लेट पहचान प्रणाली, पुराने और उपयोग अवधि पूरी कर चुके वाहनों पर कार्रवाई तथा NCR जिलों में डीजल ऑटो-रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना शामिल रही।
CAQM ने समयबद्ध अमल, राज्य विभागों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय तथा फील्ड में लगातार जांच पर जोर दिया। आयोग ने राज्यों से किसानों के लिए फसल-अवशेष मशीनरी तक पहुंच आसान बनाने और खेतों से बाहर भूसे के प्रबंधन की व्यवस्था सुधारने को भी कहा।
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