आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भगवान सहज स्नेहवश हैं। सिर्फ मन-क्रम-वचन से कोई उनका स्मरण कर ले, भगवान उसको प्राप्त हो जाते हैं। सकल समाज वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति द्वारा जंबूरी मैदान में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव के पांचवें दिन मुरलीधर महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए यह उद्गार व्यक्त किए। मुरलीधर महाराज ने कहा कि कलियुग में धन कमाना भले मुश्किल हो, लेकिन भगवान को पाना आसान है। जब भी भक्त मन-क्रम-वचन से एक बार स्मरण करता है भगवान उसको सहज प्राप्त हो जाते हैं। हम भगवान का स्मरण तो करते हैं, लेकिन उसके पीछे हमारी सांसारिक कामनाएं होती हैं।

सहज और स्नेहवश हैं भगवान

उन्होंने कहा कि जब राजा दशरथ ने रामजी के राजतिलक का मन बनाया, तब कैकेई द्वारा दो वचनों को लेकर भरत को राजगद्दी और राम को 14 वर्ष वनवास की मांग की। प्रभु श्रीराम के निषादराज गुह से मिलने के प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि भगवान सहज और स्नेहवश हैं। सियाराम मय सब जग जानी की भावना से जगत में दृष्टिदोष समाप्त हो जाता है। भगवान से प्रेम हो जाता है। जो भी व्यक्ति रामचरितमानस का सान्निध्य पाता है, वह पाप रहित हो जाता है। मानस भगवान का जागृत रूप है।

समय का पहिया चलता है

कथा प्रसंग में संत मुरलीधर महाराज के भजनों जैसे समय का पहिया चलता है, मेरी छोटी सी है नाव कैसे बैठाऊं मेरे राम, मेरी नैया में सीताराम गंगा मैया धीरे बहो, निज चरणों की भक्ति हे राम मुझे दे दो आदि सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। संत मुरलीधर महाराज राम केवट प्रसंग सुनाकर कहा कि केवट बड़भागी है, जिसे भगवान के चरण धोने का सौभाग्य मिला।