आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : एमपी विधानसभा चुनाव में एक बार फिर किसान कर्ज माफी बड़ा मुद्दा बन रही है। कांग्रेस नेता सार्वजनिक तौर पर ये कहते हैं कि कमलनाथ सरकार में 26 लाख किसानों की कर्ज माफी हुई और बीजेपी के नेता किसानों को कर्ज माफी के नाम पर धोखा देने के आरोप लगाते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किसान कर्ज माफी को लेकर अशोकनगर में कहा- कांग्रेस ने 26 लाख फर्जी किसान ऋण माफी के प्रमाण पत्र बंटवाए। कुछ ‘मेरे हाथों से भी बंटवा दिए’।
सिंधिया के बयान पर पीसीसी चीफ कमलनाथ ने भी कहा- ‘ज्योतिरादित्य सिंधिया जो कुछ भी कहें, आम जनता गवाह है कि क्या कोई सौदा हुआ? किस प्रकार के फायदे उन्होंने उस वक्त हमारी सरकार से लिए, सब जनता जानती है, मुझे इन चीजों का जवाब देने की आवश्यकता नहीं है।’
अब जानिए सिंधिया ने कहां, क्या कहा…
शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अशोकनगर जिले के मुंगावली से भाजपा प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह यादव के समर्थन में बहादुरपुर गांव में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। इस दौरान सिंधिया ने कहा कि भाजपा के लोग आपके लिए संकल्पित हैं। नाम लिए बिना कमलनाथ-दिग्विजय को छोटा भाई-बड़ा भाई कहा। उन्होंने खुद के किए कामों को मंच से गिनाया। कमलनाथ को लेकर कहा कि जब हम उनके पास जाते थे तो कहते थे समय नहीं है चलो-चलो…। इसलिए प्रदेश की जनता, कार्यकर्ता, विधायक, मंत्री और सिंधिया ने उन्हें कह दिया चलो…।
मुझसे भी झूठे प्रमाण-पत्र बंटवा दिए
बीजेपी में जाने को लेकर उन्होंने मंच से जनता से पूछ कि मैंने सही किया या नहीं। भाजपा की सरकार ने 11 लाख 50 हजार किसानों का ब्याज माफ किया है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं गिनाईं। इस दौरान कहा कि कांग्रेस की सरकार होती तो हमारी ब्याज माफी योजना का लाभ नहीं मिलता। उल्टा कांग्रेस किसानों से पैसा ले लेती। कांग्रेस ने 26 लाख फर्जी किसान ऋण माफी के प्रमाण पत्र बंटवाए। कुछ ‘मेरे हाथों से भी बंटवा दिए’। फिल्मी अंदाज में कहा कि झूठ बोले कौआ काटे, काले कौए से डरियो। उन्होंने कहा- मैं कांग्रेस के लिए काला कौआ हूं।
कांग्रेस की सोच- जान न जाए, वचन भले ही चले जाए
बहादुरपुर के बाद सिंधिया शाढौरा पहुंचे। यहां सभा में कहा- अभी तो युद्ध का समय है। न पानी, न खाना, हाथ में ढ़ाल, तलवार और जनता की रक्षा। यह लड़ाई आप, आपके परिवार को सुरक्षित करने की है। हमारी सोच है जान जाए पर वचन न जाए। लेकिन कांग्रेस की सोच है जान नहीं जाए, वचन भले ही जाए। जनता से सवाल पूछा- ऐसे लोगों का बोरी-बिस्तर बांधकर सिंध नदी में टपका दोगे।
उन्होंने कहा कि जब मैं 2002 में शाढौरा आया था। उस समय क्या हाल था। मैं गुना से शाढौरा नहीं पहुंच पाता था। गुना-अशोकनगर पहुंचने में कमर को बचाना मुश्किल होता था। यहां के लोग ट्रेन से कहीं जाए तो गुना, अशोकनगर से जाकर ही सफर करना पढ़ता था। यहां पर ट्रेनें नहीं रुकती थी और न ही अच्छी सड़कें थी।