सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: जनजातीय समुदाय में सिकल सेल एनीमिया की जांच करना अब आसान हो गया है। केवल एक रैपिड जांच किट के माध्यम से पता किया जा रहा है कि किस व्यक्ति को सिकल सेल एनीमिया है व किसे नहीं। मध्यप्रदेश में हीमोग्लोबिनोपैथी मिशन की स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ. रूबी खान ने भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में ‘हीमोग्लोबिनोपैथी की रोकथाम एवं प्रबंधन’ विषय पर चल रही दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान यह जानकारी दी।
कार्यशाला में देशभर के विभिन्न क्षेत्रों से आए हीमोग्लोबिनोपैथी के विशेषज्ञों ने कार्यशाला में भाग ले रहे डॉक्टरों व अन्य स्टाफ को इससे जुड़ी विभिन्न जानकारियां साझा कीं। बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव ने कार्यशाला में आए सभी विशेषज्ञ वक्ताओं का आभार जताया।
डॉ. रूबी खान ने बताया कि अब तक सिकल सेल के संभावितों की जांच एचपीएलसी टेस्ट के जरिए होती थी। इस टेस्ट के लिए सैंपल को जिला अस्पताल भेजा जाता था। इस दौरान कई बार आवागमन में सैंपल के खराब होने की आशंका होती है। साथ ही रिपोर्ट आने में भी दो—तीन दिन का समय लग जाता था। अब पॉइंट ऑफ केयर टेस्टिंग से जांच बहुत आसान हो गई है।
रैपिड जांच किट के जरिए अब प्रभावित स्थानों पर घर—घर जाकर आसानी से जांच हो जाती है और परिणाम भी तुरंत आ जाता है। इससे अधिक से अधिक लोगों में सिकल सेल एनीमिया की जांच करना आसान हो गया है। अब हम बड़ी संख्या में सिकल सेल की स्क्रीनिंग कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि सबसे पहले अलीराजपुर और झाबुआ जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे शुरू किया गया था, लेकिन अब मध्यप्रदेश के 89 आदिवासी विकास खंडों में इसे शुरू कर दिया गया है।
नई दिल्ली के इंस्टिट्यूट आॅफ लिवर एवं बाइलरी साइंसेज़ के रक्ताधान चिकित्सा विभाग में प्रोफेसर मीनू वाजपेयी ने बताया कि सिकल सेल एनीमिया के 10 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं, जिनके खून में एंटीबॉडी बन जाती है। ऐसे मरीजों में खून चढ़ाने पर गंभीर रिएक्शन होने लगता है, जिससे उनकी जान खतरे में पड़ जाती है। अगर एंटीबॉडी की जांच हो जाए, तो मरीज को उस विशिष्ट कैटिगरी का ब्लड चढ़ाया जा सकता है। हालांकि परेशानी की बात यह है कि बहुत कम अस्पतालों में एंटीबॉडी जांच की सुविधा है। इससे जांच करने में दिक्कत आती है। सरकार को सभी मेडिकल कॉलेजों में यह जांच शुरू करने की व्यवस्था करना चाहिए, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
बीएमचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि हम बीएमएचआरसी में एक एडवांस मॉलिक्युलर लैब तैयार करना चाहते हैं। इसके लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा है।