सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केरल में मुस्लिम परिवार में जन्मे और सनातन धर्म की नाथ परंपरा से दीक्षित योगी व आध्यात्मिक गुरु श्री एम. का कहना है कि अयोध्या में भारत की सबसे भव्य मस्जिद बनने जा रही है। राम मंदिर का विरोध करने वालों को समझना चाहिए कि किसी सनातनी ने इसका विरोध नहीं किया।
भारतीय मुस्लिमों को मध्यकाल में हुई गलतियों पर सफाई देने के बजाए प्रमाणों के आधार पर कब्जाए गए धार्मिक स्थल स्वेच्छा से लौटा देना चाहिए। श्री. एम हैदराबाद स्थित मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं और क्रिया योग के विशेषज्ञ हैं। उनके बचपन का नाम मुमताज अली है। हिमालय में दीक्षा के दौरान उनके गुरु ने उन्हें नया नाम मधुकर नाथ दिया। पेश हैं उनसे बातचीत के संपादित अंश…।
- ज्ञानवापी विवाद पर क्या कहना है?
– यह मसला कोर्ट में हैं, जो भी निर्णय होगा वह कानून के मुताबिक ही होगा। लेकिन मुस्लिमों को समझना चाहिए कि भारत में मध्यकाल की तरह अब इस्लामिक हुकूमत नहीं हैं। बेहतर यही होगा कि उस वक्त को भुलाकर सनातन आस्था के ऐसे सभी धार्मिक स्थल जिनके बारे में यह प्रमाण उपलब्ध हैं कि उन्हें जबरन तोड़ा या कब्जाया गया, उन सभी को स्वेच्छा से छोड़ देना चाहिए।
- राममंदिर निर्माण-बाबरी मस्जिद मुद्दे को किस नजर से देखते हैं?
– राम का चरित्र, हर भारतीय के हृदय में बसता है। बाबर के सेनापति मीर बाकी ने राम मंदिर को ध्वस्त कर बाबरी मस्जिद बनाई थी। इसमें किसी को संदेह नहीं हैं कि वहां मंदिर था। 500 साल पहले मस्जिद बनने के बाद भी सनातन धर्म के लोग सह अस्तित्व की भावना से मस्जिद के सामने एक चबूतरे पर रामलला का पूजन करते रहे। कभी मस्जिद को नुकसान नहीं पहुंचाया। जब दोबारा मंदिर बनाने के प्रयास हुए तो रोका गया। इसी से विवाद खड़ा हुआ जिसके परिणामस्वरूप भावनात्मक आंदोलन में बदल गया और मस्जिद टूट गई। मध्यकाल में मंदिर तोड़े गए, लेकिन हिंदुओं ने उसे भुलाकर अपने नए मंदिर बनाए, ठीक वैसे ही मुसलमानों को यह बात भूलकर आगे बढ़ना चाहिए।
- इस्लामिक परिवार में रहते योग साधना की प्रेरणा आपको कैसे आई?
– साढ़े 8 साल की उम्र में बाबा महेश्वर नाथ ने मुझे दर्शन दिए थे। उन्होंने पूछा था कि कुछ याद है? तब में कुछ नहीं समझा। केरल में बर्फ नहीं पड़ती, पर बादल देखकर मुझे बर्फ से ढंके हिमालय की याद आती थी। जब योग साधना की प्रेरणा हुई तो परिवार वालों को समझाया कि अल्लाह का अर्थ एक सुप्रीम बीइंग हैं। ऋग्वेद में कहा गया है एकमं सत विप्रा बहुदा वदन्ति। मेरे पिता फिलोसॉफी ग्रेजुएट थे। खूब पढ़ते-लिखते थे। मां कुछ ज्यादा धार्मिक नहीं थी। परिवार में पढ़ने-लिखने का माहौल अच्छा था। परिवार ने मेरी बात को समझा।
- भारत में हिंदू-मुस्लिम एकता कैसे मजबूत हो सकती है?
– भारत जैसे सहनशील देश पूरे संसार में नहीं हैं। हाल ही में नार्वे में वहां के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार कुरान को पब्लिक पार्क में फाड़ते और जलाते दिखाए गए थे, यूरोप के कई देशों में मीनारें तोड़ी गई हैं, लाउडस्पीकर पर बैन कर दिया गया है। लेकिन भारत में कभी किसी ने ऐसा नहीं किया, क्योंकि यहां सनातन धर्म के मानने वाले लोग हैं, जो सभी की धार्मिक भावनाओं को सम्मान करते हैं।
- आपका नाम मुमताज है, परिवार मुस्लिम है और आप सनातन धर्म के आध्यात्म की बात करते हैं?
– मैंने कभी कन्वर्जन नहीं किया। लोयला कॉलेज पढ़ने गया, क्रिश्यिनिटी का बहुत अध्ययन किया। मेरे टीचर्स ने मुझे सेमिनार ले जाने की बहुत कोशिश की, पर मैंने प्रीस्ट बनने से इनकार कर दिया। मैं 5 बार नमाज नहीं करता, शरीयत को भी फॉलो नहीं करता। पूरी तरह वेजिटेरियन हूं। मैंने जो सीखा है वह बाबाजी से और सनातन धर्म शास्त्रों से सीखा है। उसी को मैं योग साधना में सिखा रहा हूं। मैंने पासपोर्ट में कभी नाम नहीं बदला। लेकिन हिमालय में बाबाजी ने मुझे जब दीक्षा दी तो नया नाम मधुकर नाथ नाम से दी। लेकिन मैंने जन्म के समय मुझे जो मुमताज अली नाम मिला था, मैंने उसे कभी बदला नहीं। श्री एम में जो एम है, वह मधुकर नाथ ही है।
- आपका धार्मिक स्टेटस क्या माना जाए?
– सनातन धर्म। जो अनंत है, पूर्व काल से चलता रहा है, भले ही उसमें कई परिवर्तन आ गए हों, लेकिन उसका मूल तत्व कभी नहीं बदला।
- आप गृहस्थ हैं लेकिन संन्यासियों वाली साधना करते और सिखाते हैं?
– मेरे मन में सन्यासी बनने का बहुत आग्रह था, लेकिन बाबाजी ने संन्यासी बनने से मना किया और विवाह कर गृहस्थ की तरह रहने का कहा था। इसके बावजूद मैंने दो तीन बार सन्यास लेने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा। फिर मैंने शादी कर ली। मेरी पत्नी हिंदू हैं।
- क्या कभी कट्टरपंथी मौलवियों के फतवों का सामना करना पड़ा?
– कई बार हुआ है। मेरे ऊपर हमले भी हो चुके हैं। लेकिन मैं डरता नहीं हूं, मैं एक योगी हूं, और जानता हूं कि मैं यह शरीर नहीं हूं। बाहर से देखने वालों को भले ही यह शरीर ही दिखाई देगा। मुझे लगता है कि बाबाजी ने ही कोई राह तय की थी, जिस पर चलते हुए मैं काम कर रहा हूं।