आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केजी त्रिवेदी स्मृति राष्ट्रीय नाटय समारोह के अंतिम दिन अभिज्ञान नाट्य संस्था नई दिल्ली ने कवि रविन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित कहानी ‘पत्नी का पत्र’ का नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया। नाट्य रूपांतरण सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय का है। शहीद भवन में मात्र दो महिला कलाकारों ने पूरी कहानी का नाटक बहुत ही सुरिचिपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। निर्देशिका निशा लोकेन्द्र त्रिवेदी के कसे निर्देशन के साथ सुगम संगीत व सटीक प्रकाश व्यवस्था ने इस नाटक में चार चांद लगा दिए।

सामान्यतः रविन्द्र साहित्य को एक विशेष वर्ग द्वारा ही पसंद किया जाता है और महिलाओं की सामाजिक स्थिति पर केंद्रित रहता है। यह कहानी भी दो महिलाओं की है, जिसमें बताया है कि उनकी घर में क्या जगह है और किस छटपटाहट से हमेशा समझौता करते हुए सारे रिश्तों को निभाते हुए अपना जीवन यापन करती हैं और अंत में एक महिला इस जंग में समर्पण कर, समाज को बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर जाती है।

शिखा आर्य और मरियम बानो ने अपने अभिनय की स्पष्ट छाप दर्शकों पर छोड़ी। लीक से हटकर तैयार किए गए इस नाटक को देखने ज्यादा दर्शक नहीं आए, पर एक सवाल तो उपस्थित दर्शकों के मन में पैदा तो कर ही गया कि आखिर कब हमारे समाज में महिलाओं को बराबरी का दर्जा मिलेगा?