सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान में शनिवार को भारतीय भाषा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के सहयोग से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का म शुभारंभ राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने किया। शुभारंभ सत्र की अध्यक्षता लेखक और इतिहासविद् पद्मश्री विभूषित विष्णु पंडया ने की। संग्रहालय के संस्थापक निदेशक विजयदत्त श्रीधर ने बताया कि महोत्सव में विमर्श के तीन आयाम हैं-हिन्दी और जनपदीय लोकभाषाएं, हिन्दी और भारतीय भाषाएं तथा हिन्दी और विश्व भाषाएं शामिल है।
राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने कहा, यहां साहित्य के दिग्गज बैठे हैं पहली बार इतने सारे साहित्यकार मिले हैं। पहली बार इनसे परिचय हुआ सम्मानित किया, राज्यपाल को बहुत सारे कार्यक्रम में जाना होता है। मगर जो राष्ट्र की साहित्य पर जिसको पकड़ है, ऐसे लोगों से मिलना होता है तो अति आनंद होता है। मैं श्रीधर जी का आभार मानता हूं। संग्रहालय के पूर्व के आयोजनों में तीन बार शामिल हुआ, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में लोकप्रिय पुस्तकों को रचनाकारों को भी बधाई देता हूं, यह लोग हिंदी को मजबूरी देने के लिए लोगों को आगे प्रेरित करेंगे। हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, इसमें हमारा गौरव है। आजकल वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़ने की सुविधा दी है यह एक क्रांति है। जिस तेजी से आज की पीढ़ी इसका इस्तेमाल कर रही है, इससे यह प्रतीत होता है कि आने वाली पीढ़ी इसे और आगे बचाएगी और इसके महत्व को अवगत भी करवाएगी।
देश की विविधताओं के साथ भाषाओं में भी विविधता
राज्यपाल ने कहा हमारे देश में विविधता है, उसी तरह भाषा में भी विविधता है, हिंदी में बात करनी हो तो बहुत अच्छा लगता है। कभी कभी दिमाग कई बातों से विकृति आ जाती है, कई बार हम क्या क्या बोल देते हैं वह एक चिंता का विषय बनती है। एक बार एक मीटिंग में एक आदमी ने गलत जब बाद में उनके पास गया और बैठाया और पानी पिलाया, उनको आक्रोश है मगर हमें संयम रखना बहुत जरूरी है। मैं कई किताबों को पढ़ता हूं तो मन में आनंद आ जाता है, गौरव की बात है कि हमारे समाज में इन साहित्य कारों ने ऐसा साहित्य दिया है जिसको पढ़कर मन आनंदित हो उठता है। जब नरेंद्र भाई सीएम बने तो वह पंडित श्यामजी कृष्ण का जिनेवा से अस्थियां लाए, कच्छ में इसको स्थापित किया। मुझे विश्ववास है कि भारतीय भाषा का आयोजन युवाओं को जोड़ेगा और अनुसंधान के लिए प्रेरित भी करेगा। विश्वविद्यालय में यह काम केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने शुरू कर दिया है। राज्यपाल की और से जो भी कार्यक्रम करना इसकी पूरी तैयारी है।
यह सेशन होंगे खास
हिन्दी और जनपदीय लोकभाषाएं विमर्श सत्र की अध्यक्षता म.प्र. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अध्यक्ष सुखदेव प्रसाद दुबे करेंगे। डॉ. श्रीराम परिहार के बीज वक्तव्य के साथ डा. रामबहादुर मिश्र (अवधी), सोमदत्त शर्मा (ब्रज), डा. सरोज गुप्ता (बुंदेली) और शानु झा (मैथिली) के व्याख्यान होंगे। इस सत्र का संचालन शिवकुमार विवेक करेंगे।‘हिन्दीऔरभारतीय भाषाएँ‘विमर्श सत्र की अध्यक्षता माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश करेंगे। उनका समापन वक्तव्य मलयालम और दक्षिण भारत की भाषाओं की समृद्ध परंपरा पर होगा। डॉ. संजय द्विवेदी के बीज वक्तव्य के साथ डा. कृपाशंकरचौबे (बांग्ला), डा. उषारानी राव (कन्नडा)और विष्णु पण्ड्या (गुजराती) के व्याख्यान होंगे।
बताया पंडित श्याम जी कृष्ण के बारे में
पद्श्री विष्णु पंडया ने कहा इस अवसर पर ऐसा लगता है कि एक विविध भारती की संज्ञा इकठ्ठी हुई है, प्रत्येक भाषा हमारी जननी है, हर बोली में कितना साहित्य रहा है। पंडित श्याम जी कृष्ण वर्मा की बात करते हुए कहा कि वह लोकमान्य तिलक के आदेश के अनुसार वह लंदन गए, इसके अलावा 1905 से 1922 तक उन्होंने अखबार चलाया। पूरी जिंदगी उन्होंने इसमें लगा दी, हमारे यहां 50 से ज्यादा लोग हैं जो हिंदुस्तान वापस नहीं आ पाए। वह वहां से वह पेरिस गए। पंडित श्याम-जी कृष्ण वर्मा की जीवनी भी 1935 में प्रकाशित हुई वह भी अंग्रेजी में, उनका जब वह देहांत हुआ तो उन्होंने वसीयतनामा किया, उन्होंने कहा कि मेरी अस्थि को सुरक्षित रखा जाए, और भारत आजाद हो जाए तो वहां विसर्जन किया जाए, जिसके बाद 2002 में उस समय के मुख्यमंत्री नरेद्र मोदी वहां से अस्थियां लाए।