सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर ने संस्कृतविद्या के उन्नायक, समीक्षक , कवि ,नाट्यकार, कथाकार,विचारक ,लेखक के रूप में विश्व के धरातल पर प्रतिष्ठित आचार्य राधावल्लभत्रिपाठी के ७५ वें जन्मदिवस को अमृतमहोत्सव के अन्तर्गत भव्यरूप में मनाया ।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में भूमिकेश्वर सिंह ने बताया कि राधावल्लभत्रिपाठी न केवल संस्कृतविद्या के उन्नायक है, अपितु वे वैश्विक विद्याओं के विकास पुरुष के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। आपने भारतीय ज्ञान परम्परा को लेकर समाज में चेतना जागृत करने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया । सारस्वत अतिथि के रूप में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नईदिल्ली के प्रो भागीरथि नन्द जी ने कहा कि आचार्य त्रिपाठी नें मुझ जैसे असंख्य संस्कृत और भारतीय विद्या के विद्यार्थियों को अपने भविष्य निर्माण के लिये प्रेरित कर जीवन को उत्कर्ष प्रदान किया है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए लक्ष्मीनारायण पाण्डेय ने बताया कि आज संस्कृत के क्षेत्र में जो नवाचार दिखाई देता है, वह आचार्य राधावल्लभ त्रिपाठी के अतुलनीय परिश्रमपूर्ण योगदान का फल है। निदेशक रमाकान्त पाण्डेय ने कहा कि संस्कृत जगत् में रोजगार की सम्भावनाओं को पूज्य गुरुजी राधावल्लभ त्रिपाठी ने खोजकर हम सबके बीच रखा है । जैसा कि अभी पूर्व वक्ताओं ने त्रिपाठी के विराट व्यक्तित्त्व को लेकर मार्गदर्शन किया है । मैं इतना ही कहूँगा कि त्रिपाठी जैसा विराट व्यक्तित्त्व वैश्विक धरातल पर सर्वदा पूज्य हैं और पूज्य ही रहेंगे । अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए कुलपति श्रीनिवास वरखेडी ने बताया कि आज जो संस्कृत नाट्यविद्या के प्रचार प्रसार की क्रान्ति आई है, उसके जनक आचार्य त्रिपाठी को ही मान्य किया जाता है्।
संस्कृत रूपकों के नाट्यशास्त्रीय प्रयोग के प्रति सर्वाधिक प्रोत्साहन त्रिपाठी के द्वारा ही दिया गया है। मुझे प्रसन्नता है कि विश्वविश्रुत आचार्य त्रिपाठी को केन्द्रित कर आज विश्वविद्यालय का भोपाल परिसर छात्र, अध्यापक, समाज के सुप्रतिष्ठित जन सहित राधावल्लभत्रिपाठी के
७५वें जन्म दिवस को अमृतमहोत्सव के रूप में आयोजित कर गौरव का अनुभव कर रहा है। मैं त्रिपाठी के व्यक्तित्त्व से प्रभावित हूँ साथ ही निदेशक रमाकान्त पाण्डेय को भी बधाई देता हूँ, जो उनके द्वारा कार्यक्रम की यह परिकल्पना कर उसे मूर्तरूप दिया गया । इस सारस्वतामृतम् अमृतमहोत्सव कार्यक्रम में देशभर से आभासीय पटल पर भी विद्वानो ने विचार रखे उनमे रामलखनपाण्डेय लखनऊ, विजयपाल शास्त्रि, हरिद्वार, रामकुमार शर्मा, जयपुर तथा प्रत्यक्ष रूप में उपस्थित सुबोध शर्मा, अर्चना दुबे , सनन्दन कुमार
त्रिपाठी, नीलाभतिवारी जैसे अनेक गणमान्य आचार्यों ने त्रिपाठी से सम्बद्ध अपनी
भा्वाभिव्यक्ति प्रकट की । मुंबई से पधारी कलासाधिका श्रीमती चिन्मयि-
जोयलमुखर्जी नें राधावल्लभ त्रिपाठी की संवेदनाओं से भरी कविताओं की संगीतमय प्रस्तुति से
सभा को मोहित कर दिया । आयोजकपरिसर ने इस सारस्वत अनुष्ठान में भारतीय परम्परा के
अनुसार आ्चार्य राधावलभत्रिपाठी का अमृताभिषेक कर अभिनन्दन पत्र, शाल, श्रीफल
तथा पुष्पाहर से सम्मानित किया ।