आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : गोधूली बेला, रंगीन रोशनी से गुलजार मंच और ‘यू रेज मी अप’ प्रार्थना गाते प्रायमरी के बच्चे। ये नजारा अरेरा कॉलोनी स्थित सेंट जोसफ को-एड स्कूल प्रांगण का है। स्कूल के वार्षिकोत्सव में विद्यार्थियों ने रंग-बिरंगी ड्रेस में क्लासिकल एवं कुचीपुड़ी नृत्य द्वारा छात्राओं ने सभी का मन मोह लिया। इस नृत्य के माध्यम से विभिन्न रसों को दर्शाया है। अपने चेहरे के भावों के माध्यम से अपनी भावनाओं को दर्शाया। केजी कक्षा के छात्रों ने मंच का संचालन किया, उनकी बोली एवं भावों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में आए अभिभावकों का मंच संचालन करने वालों ने स्वागत किया। संस्कृति के प्रतीक दीप को प्रज्जवलित कर मुख्य अतिथि आर्च बिशप दुरईराज, एसवीडी स्कूल प्राचार्य फादर रोनाल्ड वॉन, हेडबॉय, हेड गर्ल सिस्टर आदि ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यहां मुख्य अतिथि का पौधा देकर स्वागत किया गया। स्कूल के प्राचार्य ने स्वागत भाषण में कहा कि संगीत ऐसी सार्वजनिक भाषा है, जो शब्दों को पार करती है, यह भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा रहा हैं।

वेदों की भक्ति गाथाओं से लेकर क्लासिक रागों की भाव पूर्ण मेलोडिज तक संगीत ने हमारी आध्यात्मिक परंपरा को आकार दिया है। हमारी कहानियों को सुनाया है और हमें दुनियां के साथ एक संतुलन की भावना रखने का रास्ता दिखाया है। समारोह में नृत्य और नाटकों के माध्यम से यह बताया गया कि भावनाएं ही एक-दूसरे से संबंध बनाने में सक्षम है। प्राचार्य ने कहा कि रसों के माध्यम से अभिव्यक्त कर जीवन को रसमय बनाएं।

केजी कक्षा के नन्हे-मुन्हे छात्रों ने “बावरे-बावरे” “आईला रे आईला रे “जियो तो एक पल ऐसे जियो’ गानों पर नृत्य की प्रस्तुति दी। बाल गीत में हर उम्र के छात्र शामिल हुए, जो बताते हैं कि व्यस्त जिंदगी में हम जीना भूल गए हैं। बच्चों ने चूहा-बिल्ली, तो कहीं हाथी का वर्णन किया। अरेबियन वस्त्र पहन छात्रों ने “आओ एक बनाएं चक्कर फिर उस चक्कर में एक चक्कर गीत” नृत्य की प्रस्तुति दी।

राजस्थानी ड्रेस में “अरा रा रा रा रा टेसू राजा बीच बजार खड़े हुए है घने अनार’ छात्राएं देखते ही बन रही हैं। “जूते का अविष्कार” नाटक में स्वच्छता का संदेश दिया, जिसे राजा व मंत्रीगण के माध्यम से दर्शाया गया है। अतः किसी भी चीज के अनेक बार प्रयास करने के बाद उसका हल मिल जाता है।

“नाचेंगे अपनी लुंगी उठाके और मैं नाचा तो सबको करंट लगा” गानों पर छात्रों ने बेस्टर्न डांस किया। नृत्य व नाटक के द्वारा केजी कक्षा के छात्रों ने मन मोह लेने वाली ड्रेस में फोन का प्रयोग न करने का संदेश दिया। यहां पुराने समय का बायस्कोप को दर्शाया गया है। जिसे बच्चों ने देखा।

बच्चों ने ‘लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा’ पर नृत्य की प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि आर्च बिशप ने “वी आल नीड देट समवन’ गाना गाया और बधाई देते हुए कहा कि हमें अपने आसपास की चीजों का ध्यान रखना है। हमें अकेला नहीं रहना चाहिए, सबके साथ व सहयोग से रहना चाहिए।

प्रायमरी छात्राओं द्वारा भरत नाटयम् जयतु जयतु भारतम” गाने पर रोचक नृत्य की प्रस्तुति दी। “लहरा दो लहरा दो” गाने को दर्शकों की खूब सराहा। सोने का कंगन नाटक में लालच को दिखाते हुए संदेश दिया कि हमें लालच से नुकसान होता है। रंग-बिरंगे वस्त्रों में छात्र व छात्राओं ने वेस्टर्न डांस की प्रस्तुति दी। स्कूल केबिनेट की कल्चरल मंत्री द्वारा सभी को धन्यवाद दिया। फिनाले में बच्चों ने मन को प्रफुल्लित करने वाले संगीत पर नृत्य की प्रस्तुति दी और राष्ट्रीय गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।