सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: मध्यप्रदेश का प्राचीन इतिहास कला व संस्कृति का इतिहास है। यहां जहां एक ओर वास्तुकला के अद्भुत नमूने मिलते हैं वहीं दूसरी ओर दर्शन व ज्ञान-विज्ञान के भी चिन्ह प्राप्त होते हैं। मध्यप्रदेश के प्राचीन गौरवमई इतिहास से युवा पीढ़ी को अवगत कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, विधि संस्थान व मानविकी एवं उदार कला संकाय रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया।

जिसमें गुप्त कालीन स्थल उदयगिरी व बौद्ध धर्म के प्राचीन गौरव के लिए विश्वविख्यात सांची के स्तूप का भ्रमण करने 50 विद्यार्थियों का दल राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी गब्बर सिंह व विधि संस्थान की असिस्टेंट प्रोफेसर माधवी पाटकर के नेतृत्व में गया। भ्रमण का उद्देश्य बताते हुए गब्बर सिंह ने बताया कि उदयगिरी में संभवत: देश की पहली गणेश प्रतिमा है। यहां चट्टानों पर उत्कीर्ण शंख लिपि भी दुनिया की सबसे पुरानी लिपियों में से एक है। मौर्य वंश के सम्राट अशोक से लेकर गुप्तवंशीय सम्राट विक्रमादित्य तक की यह कर्मभूमि रही है।

इसी प्रकार सांची बौद्ध धर्म व दर्शन की ऊंचाइयों की ओर संकेत करता है। वहीं पर हमें गुप्तकालीन शुरुआती मंदिरों के अवशेष भी मिलते हैं। शैक्षणिक भ्रमण के सफल आयोजन पर मानविकी एवं उदार कला संकाय कि डीन रुचि मिश्रा तिवारी व विधि संस्थान की एचओडी नाईश ज़मीर ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं।