अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन के मजबूत माने जाने वाले राज्यों में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की जीत ने चुनावी नतीजों को ऐतिहासिक बना दिया। इसे पिछले करीब 50 वर्षों में रिपब्लिकन पार्टी की सबसे बड़ी मध्यावधि चुनावी हारों में से एक बताया जा रहा है।
इस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के पास सत्ता, राष्ट्रपति का समर्थन और प्रचार के लिए भारी आर्थिक संसाधन मौजूद थे। रिपब्लिकन और उनसे जुड़े संगठनों ने चुनाव प्रचार में अरबों डॉलर खर्च किए। इसके बावजूद पार्टी मतदाताओं का भरोसा कायम नहीं रख सकी। वॉशिंगटन पोस्ट के विश्लेषण के मुताबिक, प्रतिस्पर्धी चुनावी क्षेत्रों में रिपब्लिकन ने डेमोक्रेट्स से अधिक खर्च किया, लेकिन इसका फायदा नतीजों में नहीं दिखा।
हार के पीछे महंगाई, रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतें, ईरान के साथ युद्ध और ट्रम्प सरकार की नीतियों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। चुनाव बाद हुए सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने जीवनयापन की बढ़ती लागत को वोट देने का अहम आधार बताया। युवा, हिस्पैनिक और अश्वेत मतदाताओं के बीच भी रिपब्लिकन समर्थन में गिरावट दर्ज की गई।
ट्रम्प ने प्रचार के दौरान मतदाताओं से चुनाव को उनके नेतृत्व पर जनमत संग्रह की तरह देखने की अपील की थी। नतीजों के बाद पार्टी के भीतर उम्मीदवारों के चयन, नेतृत्व और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अब कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण ट्रम्प के विधायी एजेंडे के सामने नई चुनौती खड़ी करेगा।
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