सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: राष्ट्रीयफैशन प्रोद्योगिकी संस्थान भोपाल में खादी महोत्सव के चलते ‘सूत्र सृजन’ का आयोजन किया गया जिसमें अलग – अलग हथकरघा तकनीकों को दिखाने अनेक हस्तशिल्प कारीगर आये।
हथकरघा जिसे हैंडलूम भी कहा जाता है, एक पारंपरिक तकनीक है जिसमें कपड़े को हाथ से बुना जाता है, जिसमें किसी भी मैकेनिकल सहायता का उपयोग नहीं होता है। भारत में, हैंडलूम बुनाई का इतिहास कई सदियों से है और यह देश के सांस्कृतिक और सामाजिक ढांचे में गहरी जड़ें बांध चुका है।
हैंडलूम बुनाई भारतीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, और निफ़्ट भोपाल ने क्राफ़्ट बाज़ार का आयोजन कर इसे प्रोत्साहित करने के लिए एक कदम उठाया। इस दिवस पर हस्तशिल्प कारीगरों को उनकी शिल्प को दर्शाने का एक मौक़ा मिला जिसमें जूट बैग से लेकर मीनकारी आभूषण, चन्देरी, गोंड और जरदोज़ी, यहां तक की गोबर शिल्प, बटिक, एवं लाख के खिलौने की स्टाल्स मौजूद थी।
निफ़्ट भोपाल के डायरेक्टर लेफ़्टिनेंट कर्नल आशीष अग्रवाल जी ने दिवस का उदघाटन करते हुए कहा, “इस क्राफ्ट बाज़ार के आयोजन से हम छात्रों एवं सभी कर्मचारियों को हथकरघा एवं सूत कताई के बारे में जागरूक करना चाहते हैं। हैंडलूम क्षेत्र में निवेश करके हम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति में सुधार कर सकते हैं, जिससे लोगों को विकास की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।”
अंदर मौजूद स्टाल्स को देख कर फैशन कम्युनिकेशन की छात्रा कृतिका कश्यप बोलती हैं, “मुझे सभी कारीगरों से बात कर के पता चला कि हमारा देश हस्तशिल्प में कितना अमीर है। यह देख कर की ये साड़ी, मीनाकारी आभूषण, यहाँ तक ये फोटो फ़्रेम्स भी हाथों से बने हैं, मैं बस अचंभितही नहीं बल्कि खुश हूँ की मुझे इसका ज्ञान मिला।”
इस अवसर पर सूत कताई कार्यशाला का भी आयोजन किया गया था जिसके लिये खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, भोपाल के कारीगर श्री महेश अहिरवार जी को आमंत्रित किया गया। सूत कताई को समझाते हुए महेश अहिरवार जी ने बताया, “सूत कताई की कला हमारे देश के लिए एक बहुत ही अहम आभूषण है। मैंने बहुत लोगों को देखा है जिन्हें इस कला के बारे में नहीं पता है। पर आज मुझे इन छात्रों ने दिखा दिया कि आने वाली पीढ़ी अपनी संस्कृति की जड़ो से जुड़ने की इच्छा रखती है। मुझे इन्हें यह कला समझाते हुए बहुत ख़ुशी हुई क्योंकि इन छात्रों की अभिलाषा ने मुझे दिखा दिया की देश बदल रहा है।” इस कार्यशाला के माध्यम से छात्रों ने जाना की कताई हमारे देश के लिए और समाज के लिए कितनी महत्वपूर्ण है और इसे कैसे किया जाता है।