सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : एम्स भोपाल में कुछ समय पहले एक महिला कार्डियक ओपीडी में आई। उनको पहले से पेसमेकर लगा हुआ था। जब वे ओपीडी में आई थी, तब पेसमेकर डिवाइस और तार दोनों शरीर से बाहर लटक रहे थे। जिसके चलते उस जगह संक्रमण भी फैल चुका था। ऐसे में पुराने तारों व डिवाइस निकालना डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती थी।
अकसर इस तरह की प्रक्रिया असंभव सी मानी जाती है। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक अजय सिंह के कुशल नेतृत्व में संस्थान के डॉक्टर मरीज की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए अग्रसर रहते हैं। यही कारण है कि इस जटिल सर्जरी को कार्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने सफलता पूर्वक किया है। जिससे मरीज की जान बचाई जा सकी। यही नहीं मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है। बता दे कि यह प्रक्रिया राज्य में अब तक सिर्फ दो बार हुई है। वहीं राज्य के किसी भी सरकारी अस्पताल में इस तरह की सर्जरी पहली बार की गई है।
इसलिए चुना इंट्राकार्डियक पेसमेकर का विकल्प सर्जरी करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि महिला को पुराने पेसमेकर वाली जगह पर संक्रमण था। डिवाइस और तार दोनों शरीर से बाहर लटक रहे थे। एक कठिन प्रक्रिया में तारों सहित पिछले उपकरण को सफलतापूर्वक हटा दिया गया। जिससे संक्रमण के इलाज में मदद मिली। इसके बाद कोरोनरी धमनी में बीमारी के लिए सीटीवीएस टीम द्वारा कोरोनरी बाईपास किया गया। फिर रक्त में बार-बार होने वाले संक्रमण और पिछले इतिहास को देखते हुए इंट्राकार्डियक पेसमेकर का विकल्प चुना गया।
सिर्फ 30 मिनट में हुई सर्जरी
यह प्रक्रिया आधे घंटे की अल्प अवधि में सफलतापूर्वक संपन्न की गई। पेसमेकर लगाने के लिए मरीज को छाती पर किसी कट की जरूरत नहीं पड़ी और न ही किसी तार की जरूरत पड़ी। एक छोटा उपकरण (माइक्रा) हृदय के अंदर डाला गया और रोगी को हृदय गति की समस्याओं से राहत मिल गयी ।
डॉक्टरों की टीम किसलय श्रीवास्तव, मधुर, भूषण शाह की कार्डियोलॉजी टीम द्वारा सीटीवीएस टीम के बैकअप सहयोग से सफलतापूर्वक किया गया। इसमें योगेश निवारिया, किशन, सुरेंद्र और विक्रम वती भी शामिल रहे।
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक अजय सिंह ने कहा, “इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक करने पर हमें अपनी टीम के असाधारण कौशल और समर्पण पर बेहद गर्व है। यह उपलब्धि एम्स भोपाल की असाधारण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने और चिकित्सा नवाचार की सीमाओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”