सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: राजेन्द्र सिंह “राही” कोमल अनुभूतियों के ऊर्जावान कवि हैं। इनकी कविता ने जो लिबास पहना है वह किसी से उधार लिया हुआ नहीं है बल्कि निजी है। ये बात वरिष्ठ साहित्यकार मयंक श्रीवास्तव ने कही। वे राजेन्द्र सिंह “राही” के प्रथम काव्य संग्रह ‘तलाश – मेरी उनतालीस कविताएं’ के विमोचन पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राजेन्द्र ने अपनी कविता में चमत्कारिक शब्दों का ओरयोग करके गूढ़ बनाने की कोशिश नहीं कि है बल्कि ऊनी जीवन-यात्रा में जो अनुभव किया है एवं भोगा है वह बड़ी सादगी के साथ सरल शब्दावली में रेखांकित किया है।

राजेन्द्र सिंह फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इण्डिया से सेवानिवृत्त हैं और स्कूल के दिनों से ही कविताएं लिखते रहें हैं जिनका पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन होता रहा। व्यवस्थित रूप से ये उनका पहला संग्रह है जिसे पहले पहल प्रकाशन ने प्रकाशित किया है।
होटल राजहंस में आयोजित विमोचन कार्यक्रम में नर्मदा यात्री और लेखक मनोज अत्रे एवं कवि अशेष श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे। मनोज अत्रे ने गोमाता से जुड़ा संस्मरण सुनाया वहीं अशेष श्रीवास्तव ने कविता की रचना प्रक्रिया पर कविता सुनाई।
विमोचन कार्यक्रम में शहर के प्रतिष्ठित नागरिक, बुद्धिजीवी, प्रकाशक पुष्कर भाटी, स्कूल मित्र, परिवारजन मौजूद थे।