सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : संस्कृत नाटकों की विश्वमंगल भावना पर प्रो. राघवेंद्र भट्ट का व्याख्यान

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर के नाट्यशास्त्र अध्ययन एवं अनुसंधान केन्द्र द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संस्कृत रूपक निर्देशन कार्यशाला के नवम दिवस के प्रथम सत्र में शृंगेरी (कर्नाटक) से पधारे प्रख्यात विद्वान प्रो. राघवेन्द्र भट्ट ने संस्कृत नाटकों की कथावस्तु एवं नागानन्द नाटक के संवाद विषय पर व्याख्यान दिया।

प्रो. भट्ट ने अपने व्याख्यान में कहा कि संस्कृत नाटकों की कथावस्तु भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने नागानन्द नाटक की कथावस्तु का विश्लेषण करते हुए बताया कि यह नाटक करुणा, त्याग, अहिंसा और लोकमंगल की भावना को प्रतिष्ठित करता है। उन्होंने कहा कि नाटक एक यज्ञ है, जिसमें नाटककार, अभिनेता तथा दर्शक सभी सहभागी होते हैं। जिस प्रकार यज्ञ का उद्देश्य लोकमंगल और विश्वकल्याण होता है, उसी प्रकार नाट्य का उद्देश्य भी समाज में सद्भाव, संस्कार और मानवीय मूल्यों की स्थापना करना है।

उन्होंने विशेष रूप से नागानन्द नाटक के संवादों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके संवाद विश्वशांति, करुणा, अहिंसा और मानव कल्याण के संदेशवाहक हैं। इन संवादों में निहित भाव केवल कथा को आगे नहीं बढ़ाते, बल्कि संपूर्ण मानवता को शांति, सह-अस्तित्व और परस्पर सम्मान का संदेश भी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि निर्देशक और अभिनेता के लिए संवादों के भाव, आशय एवं दार्शनिक गहराई को आत्मसात कर मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना आवश्यक है।

व्याख्यान के अंत में प्रो. राघवेन्द्र भट्ट ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए नागानन्द नाटक के संवादों के उच्चारण, भावाभिव्यक्ति एवं मंचीय प्रस्तुति के विभिन्न आयामों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।यह जानकारी प्रो कृपाशंकर शर्मा संयोजक ने दी।

कार्यक्रम का सफल संचालन कल्याणी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन देवेन्द्र पाठक ने प्रस्तुत किया।"


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