सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सिंथेटिक रियलिटी के दौर में पत्रकारिता की चुनौतियां बढ़ गई हैं। न्यूजरूम में बिना पुष्टि और बैग्राउंड चैक किए किसी खबर को जारी नहीं कर सकते। एआई के जरिए डीपफेक तैयार करना और उसे फैलाना बहुत बड़े पैमाने पर होने लगा है। कई बार पुष्ट सूत्रों से भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी आ सकती है। ऐसे में टेक्नोलाजी के साथ-साथ संपादकीय विवेक से ही सही ढंग से खबरों को तैयार करने और जारी करने का निर्णय लिया जा सकता है।

यह बात एमसीयू में चल रहे एआई आधारित एफडीपी में आज उपस्थित विषय विशेषज्ञ वरिष्ठ पत्रकार प्रत्यूष रंजन ने कहीं। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस दौर में किसी भी तरह के कंटेंट की भलीभांति पुष्टि के बाद ही उसे मीडिया से प्रसारित किया जाना चाहिए। डीकफेक इन्वेस्टिगेशन में सात अलग-अलग तरह की पड़ताल को विस्तार से समझाते हुए उन्होंने आडियो एकास्टिक, विजुअल मेटाडेटा, संदर्भ, नेटवर्क और ग्राउंड रियलिटी चेक करने की प्रक्रियाओं के महत्व को बताया।

रंजन ने कहा कि एआई अपने आप में मिसइन्फर्मेन तैयार नहीं करता बल्कि यूजर्स इसके इस्तेमाल से गलत सूचनाएं तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि आज एआई बहुत बेहतरीन तरह से डीपफेक तैयार कर सकती है। इसे असली कंटेंट के मुकाबले पहचानना और मुश्किल हो गया है। ऐसे में कई ऐसे टूल्स हैं जिनकी सहायता से इस तरह की गलत सूचनाओं को पहचाना जा सकता है। श्री प्रत्यूष रंजन ने गूगल पिन पाइंट, गूगल सिंथइड सहित कई महत्वपूर्ण टूल्स पर प्रशिक्षण भी दिया। शैक्षणिक संस्थानों में अकादमिक और रिसर्च सेक्टर्स में एआई टूल्स का उपयोग करने से बहुत अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।

आज आयोजित एक तकनीकी सत्र में मीडिया शोध विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सीपी अग्रवाल ने भी एआई टूल्स पर अपने विचार रखते हुए उनकी उपियोगिता को समझाया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी विभागों के शिक्षक उपस्थित थे। इस एफडीपी के आगामी दिनों में आयोजित सत्रों में एआई और जेनरेटिव कंटेंट, मल्टिफार्म डेटा विद पिनपाइंट, डीपफेक, सिंथेटिक मीडिया फोरेंसिक्स, एआई न्यूजरूम आर्किटेक्चर, एआई एथिक्स सहित कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर देश के जाने-माने विशेषज्ञ प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देंगे।


Hashtags: #MadhyaPradeshState #Bhopal #Desksource #एमस #एआई #एफड #DeskSource #एनएन #टवर #आईट