सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर के नाट्यशास्त्र अध्ययन एवं अनुसंधान केन्द्र द्वारा आयोजित 21 दिवसीय संस्कृत रूपक निर्देशन राष्ट्रीय कार्यशाला के चतुर्थ दिवस के द्वितीय सत्र में केरल से पधारे सुप्रसिद्ध कुडियाट्टम् विशेषज्ञ वी. गिरिशन ने कुडियाट्टम् के प्रयोगात्मक पक्ष पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया।

उन्होंने प्रतिभागियों को कुडियाट्टम् की अभिनय-परम्परा, आंगिक अभिनय, नेत्राभिनय, हस्तमुद्राओं, देह-संचालन तथा मंच-प्रयोग की व्यावहारिक विधियों का सजीव प्रदर्शन कराते हुए प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने स्वयं भी विभिन्न अभिनय-प्रयोगों का अभ्यास किया तथा कुडियाट्टम् की विशिष्ट प्रस्तुति-शैली, भावाभिव्यक्ति एवं चरित्र-निर्माण की तकनीकों को निकट से समझा।

गिरिशन जी ने बताया कि कुडियाट्टम् एक रंग-प्रस्तुति नहीं, बल्कि अभिनय, साधना और अनुशासन का अद्वितीय समन्वय है। उन्होंने अभ्यास की निरन्तरता, शारीरिक नियंत्रण तथा भावाभिव्यक्ति की सूक्ष्मताओं पर विशेष बल दिया।

सत्र के अंत में प्रतिभागियों ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया तथा इस व्यावहारिक प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया।

कार्यक्रम के समन्वयक प्रो . कृपा शंकर शर्मा जी ने गिरीशन का स्वागत किया और सह समन्वयक डॉ. संगीता गुन्देचा जी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।


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