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चीन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित त्रिपक्षीय बैठक को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह बैठक 18 और 19 नवंबर को शेनझेन में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है। हालांकि, अभी इसकी तारीख, प्रारूप और एजेंडे को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने 4 नवंबर को पुष्टि की थी कि तीनों देशों के नेताओं की संभावित मुलाकात को लेकर संबंधित पक्षों के साथ बातचीत जारी है। इससे पहले क्रेमलिन ने भी बैठक की तैयारियों पर चर्चा होने की बात कही थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और रूस चाहते हैं कि चीन इस मुलाकात की मेजबानी करे, लेकिन बीजिंग ने अभी तक इसे औपचारिक रूप नहीं दिया है।

इस बैठक को लेकर चीन की सावधानी की एक बड़ी वजह यूक्रेन युद्ध है। रूस चाहता है कि बातचीत में युद्ध समाप्त करने और अपने पक्ष की शर्तों पर समझौते की संभावनाओं पर चर्चा हो। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आशंका जताई है कि कीव की भागीदारी के बिना बड़ी शक्तियां यूक्रेन के भविष्य पर फैसला न करें। उन्होंने ऐसी किसी व्यवस्था को प्रभाव क्षेत्रों के बंटवारे से जोड़कर चिंता जताई है।

चीन के लिए भी यह संवेदनशील कूटनीतिक स्थिति है। वह रूस के साथ संबंध बनाए रखते हुए यूरोप और अमेरिका के साथ अपने आर्थिक हितों को प्रभावित नहीं करना चाहता। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग बैठक की प्रतीकात्मक तस्वीर तो चाहता है, लेकिन यूक्रेन जैसे विवाद में सीधे उलझने से बच सकता है।

फिलहाल 18-19 नवंबर की संभावित मुलाकात पर अंतिम फैसला बाकी है।


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