न्यूजीलैंड में शनिवार, 7 नवंबर को आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है। मुख्य मुकाबला उनकी नेशनल पार्टी और विपक्षी लेबर पार्टी के बीच है। चुनाव प्रचार के दौरान महंगाई, कमजोर आर्थिक वृद्धि, बेरोजगारी और आम लोगों की बढ़ती जीवन-यापन लागत प्रमुख मुद्दे बने रहे। अंतिम चुनावी सर्वेक्षणों में दोनों प्रमुख दलों के बीच कड़ा मुकाबला दिखाई दिया है।
लेबर पार्टी के नेता क्रिस हिपकिंस ने लक्सन सरकार के आर्थिक प्रदर्शन और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं लक्सन अपनी सरकार के कामकाज का बचाव करते हुए अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और भविष्य में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं। मतदाताओं के बीच महंगाई और वेतन वृद्धि की रफ्तार को लेकर चिंता चुनावी बहस के केंद्र में है।
न्यूजीलैंड की मिश्रित सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व (एमएमपी) चुनाव प्रणाली के कारण किसी एक दल के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करना आसान नहीं होता। संसद में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए सामान्यतः 61 सीटों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में छोटी पार्टियों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
ग्रीन्स, एसीटी, न्यूजीलैंड फर्स्ट और उभरती ओपर्च्युनिटी पार्टी के प्रदर्शन पर भी सबकी नजर है। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में ओपर्च्युनिटी पार्टी के पांच प्रतिशत की सीमा पार करने की संभावना जताई गई है। ऐसी स्थिति में सरकार गठन के लिए उसे अहम सहयोगी के रूप में देखा जा रहा है।
मतदान के बाद प्रारंभिक परिणाम शनिवार शाम से आने शुरू होंगे, जबकि आधिकारिक नतीजे 27 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
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