सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : निफ्ट भोपाल ने ‘शाश्वत – द हैंडक्राफ्टेड हैप्पीनेस’ नामक वार्षिक क्राफ्ट बाजार निफ्ट परिसर में आयोजित किया। प्रोफेसर के. जी. सुरेश, कुलपति- माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय ने शिल्प बाजार का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि “बाज़ार शिल्पकारों, छात्रों और जनता को एक साथ लाता है, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और हस्तनिर्मित वस्तुओं की सराहना को बढ़ावा मिलता है।”
40 से अधिक कुशल कारीगरों ने अपनी समृद्ध शिल्प विरासत का प्रदर्शन किया और निफ्ट भोपाल के युवा डिजाइन छात्रों के बीच अपने मूल्यवान कौशल का प्रदर्शन किया। बाज़ार में 22 स्टॉल लगाए गए थे।
विभिन्न राज्यों और शहरों से हस्तशिल्प प्रदर्शित किए गए जैसे की चंदेरी, महेश्वर, श्योपुर, चंपा, सिरोंज, भोपाल, बिजनौर, नर्मदापुरम, नीमच, भैरवगढ़ और वारासिवनी| कई राज्य पुरस्कार विजेता कारीगरों ने निफ्ट, भोपाल के छात्रों और संकायों के साथ अपने ज्ञान और कौशल साझा किए।
प्रसिद्ध कारीगरों में शामिल थे श्री मूलचंद (महेश्वर) – राज्य पुरस्कार विजेता, श्री सिद्दीक गुट्टी (भैरवगढ़ उज्जैन) – प्रसिद्ध बाटिक कारीगर, श्री आफताब अहमद (बिजनौर) – अनुभवी लकड़ी शिल्पकार, श्री शरीफ (भैरवगढ़ बाटिक क्लस्टर) – अनुभवी और प्रसिद्ध शिल्पकार| “ये युवा मुझे चकित कर गए। उनकी जिज्ञासा संक्रामक थी, मुझे मेरे खोल से बाहर निकालती थी और मेरे शिल्प को नए सिरे से देखने के लिए प्रेरित करती थी।”-भारत कटारिया, तन सिंह, अजय राठौर, भोपाल बांस शिल्प
“इस बार शिल्प मेले में हर साल की तरह कुछ नया सीखने और सिखाने को मिला। साथी कारीगरों से बातचीत कर, उनके अनोखे विचारों से वाकिफ हुआ, जो मैंने पहले कभी नहीं देखे थे। यह अनुभव ही तो मुझे साल दर साल यहां खींच लाता है।- मोहम्मद हसीन ने हस्तशिल्प जागरूकता सप्ताह और शिल्प मेले के बारे में पूछे जाने पर कहा
क्राफ्ट इनिशिएटिव समन्वयक डॉ. श्रीमती अनुपम सक्सेना ने बताया कि निफ्ट भोपाल डिजाइन हस्तक्षेप, उत्पाद विविधीकरण और कई लुप्तप्राय शिल्पों के उत्थान के लिए इन शिल्पों के साथ मिलकर काम कर रहा है। हथकरघा और हस्तशिल्प निदेशालय और कपड़ा मंत्रालय के बीच एमओयू के अनुसार, निफ्ट को शिल्प क्षेत्र (शिल्पकार/कारीगर सहित) को टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने में मदद करने का काम सौंपा गया है।
टेक्सटाइल डिजाइन विभाग सेमेस्टर 6 से नैंसी देवांगन का कहना है कि “यह सप्ताह हमें इस बात की याद दिलाता है कि हस्तकलाकार सिर्फ खूबसूरत हस्तशिल्प नहीं बनाते हैं, बल्कि वे हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी संजोते हैं और अपनी सूझबूझ से हमें सभी को प्रेरित करते हैं।
फैशन और लाइफस्टाइल एक्सेसरी डिजाइन विभाग से सेमेस्टर 6 की हर्षिता व्यास का कहना है कि “उन शिल्पकारों से सीखना, जिनके पास साझा करने के लिए इतनी समृद्ध परंपराएं हैं, ये सचमुच एक सम्मान की बात है। इस कार्यशाला का सबसे अच्छा हिस्सा यह है कि शिल्पकार हमें कितनी धैर्य के साथ अपने प्रदर्शनों में शामिल करते हैं। कक्षा से परे सीखने का यह एक शानदार तरीका है।”
निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल आशीष अग्रवाल, संयुक्त निदेशक अखिल सहाय, अन्य गणमान्य व्यक्तियों और संकाय सदस्यों के साथ उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम सयुक्त प्रयासों से सफल रहा।